सितंबर महीने में भारत के डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक में **6.5%** की सालाना गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कुल संख्या **1.18 करोड़** रह गई है। इस बीच, IndiGo का मार्केट शेयर बढ़कर **65.4%** हो गया है, जबकि SpiceJet का शेयर घटकर महज **0.6%** रह गया है।
सितंबर महीने में भारतीय एविएशन सेक्टर में सुस्ती देखने को मिली है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के आंकड़ों के मुताबिक, डोमेस्टिक पैसेंजर ट्रैफिक 1.18 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 6.5% कम है। एविएशन सेक्टर फिलहाल परिचालन संबंधी चुनौतियों (operational constraints) से जूझ रहा है, जिसका सीधा असर फ्लाइट्स के शेड्यूल और क्षमता पर पड़ रहा है।
मार्केट में बदलता समीकरण
एविएशन मार्केट में कंसोलिडेशन तेजी से बढ़ रहा है। मार्केट लीडर IndiGo ने अपनी पकड़ और मजबूत की है, और इनका मार्केट शेयर अगस्त के 65% से बढ़कर सितंबर में 65.4% हो गया। वहीं, SpiceJet के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जिनका शेयर पिछले महीने के 1.2% से लुढ़क कर 0.6% पर आ गया है। इस बीच, Air India का मार्केट शेयर 26.8% और Akasa Air का शेयर 5.6% रहा।
परफॉर्मेंस का बड़ा अंतर
एयरलाइंस की कामयाबी का सबसे बड़ा पैमाना उनकी 'ऑन टाइम परफॉर्मेंस' (OTP) है। IndiGo 91.1% के OTP के साथ टॉप पर है, जबकि Akasa Air 90.8% के साथ कड़ी टक्कर दे रही है। इसके विपरीत, SpiceJet का OTP मात्र 16.6% रहा, जो उनकी गिरती साख और घटते मार्केट शेयर की मुख्य वजह है।
मुनाफे पर चोट और मुआवजा
ऑपरेशनल दिक्कतों का असर एयरलाइंस के खजाने पर भी पड़ा है। सितंबर में एयरलाइंस को देरी के लिए यात्रियों को करीब ₹2.86 करोड़ और कैंसिलेशन के लिए ₹42.79 लाख का हर्जाना देना पड़ा। करीब 1.19% फ्लाइट्स ऐसी रहीं जो 2 घंटे से ज्यादा देरी से चलीं।
निवेशकों के लिए यह डेटा साफ संकेत देता है कि जिन एयरलाइंस की ऑपरेशनल एफिशिएंसी बेहतर है, वही मार्केट में टिकेंगी। सर्विस फेल्योर न केवल अतिरिक्त लागत (compensation) बढ़ाते हैं, बल्कि रेगुलेटरी दबाव भी पैदा करते हैं, जो आने वाले समय में एयरलाइंस के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
