डिब्रूगढ़ के बोगीबील (Bogibeel) पोर्ट ने बांग्लादेश के लिए अपना पहला कमर्शियल कार्गो रूट शुरू कर दिया है। इस रूट के जरिए असम से **1,080 टन** मेथेनॉल की शिपमेंट भेजी गई है, जिससे नॉर्थ-ईस्ट की कंपनियों के लॉजिस्टिक्स खर्च में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।
8 दशक बाद फिर जुड़ी कड़ियां
पूर्वोत्तर भारत के लिए यह एक बड़ा लॉजिस्टिक बदलाव है। असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड द्वारा तैयार 1,080 टन मेथेनॉल की खेप ब्रह्मपुत्र नदी के रास्ते बांग्लादेश भेजी गई है। यह व्यापारिक संबंध लगभग 8 दशकों से बंद पड़ा था, जिसे अब पुनर्जीवित किया गया है।
कंपनियों को कैसे मिलेगा फायदा?
पूर्वोत्तर क्षेत्र की कंपनियों के लिए भौगोलिक स्थिति के कारण अब तक लॉजिस्टिक्स का खर्च काफी ज्यादा रहा है, क्योंकि वे महंगे सड़क मार्गों पर निर्भर थे। 783 किलोमीटर लंबे इस वाटरवे का उपयोग करके Assam Petro-Chemicals Limited और Brahmaputra Cracker and Polymer Limited जैसी कंपनियां अब बल्क कमोडिटी को आसानी से भेज सकेंगी। अगर यह रूट सफल रहता है, तो केमिकल और पॉलीमर बनाने वाली कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) पर इसका सकारात्मक असर दिखेगा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और चुनौतियां
बोगीबील साइट पर अब एक डेडिकेटेड कस्टम्स ऑफिस और जेट्टी सुविधाएं तैयार की गई हैं। Inland Waterways Authority of India (IWAI) की योजना है कि इस हब से भविष्य में कोयला, चाय और कृषि उत्पादों का भी निर्यात किया जाए।
हालांकि, सफलता पूरी तरह से ऑपरेशनल चुनौतियों पर निर्भर करेगी। ब्रह्मपुत्र नदी में पानी के स्तर में उतार-चढ़ाव और सिल्टेशन (गाद) जहाजों की आवाजाही को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि शिपमेंट की फ्रीक्वेंसी कितनी रहती है और क्या ये कंपनियां रेगुलर वॉल्यूम बनाए रख पाती हैं, जो इस पोर्ट के मेंटेनेंस खर्च को सही ठहरा सके।
