Delhivery के मुनाफे में 65% की भारी गिरावट, रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद प्रॉफिट ₹31.9 करोड़ पर, जानें वजह

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AuthorMehul Desai|Published at:
Delhivery के मुनाफे में 65% की भारी गिरावट, रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद प्रॉफिट ₹31.9 करोड़ पर, जानें वजह

लॉजिस्टिक्स कंपनी Delhivery ने पहली तिमाही (Q1) में **28%** की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, जो बढ़कर **₹2,931 करोड़** हो गया है। हालांकि, कंपनी का नेट प्रॉफिट **65%** घटकर **₹31.9 करोड़** रह गया। बढ़ी हुई ऑपरेटिंग कॉस्ट, जिसमें वेज हाइक, फ्यूल की कीमतें और Ecom Express का इंटीग्रेशन शामिल है, ने प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाला है। अब निवेशकों की नजरें कंपनी के दूसरी छमाही में मार्जिन रिकवरी के लक्ष्यों पर टिकी हैं।

नतीजों में क्या है खास?

लॉजिस्टिक्स सेक्टर की बड़ी कंपनी Delhivery ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने रेवेन्यू में 28% की मजबूत सालाना ग्रोथ हासिल करते हुए ₹2,931 करोड़ का आंकड़ा छुआ। लेकिन, बॉटम-लाइन परफॉर्मेंस में बड़ी गिरावट दिखी, जहां कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 65% गिरकर ₹31.9 करोड़ पर आ गया।

मार्जिन पर क्यों पड़ा दबाव?

मुनाफे में इस गिरावट का मुख्य कारण मार्जिन का सिकुड़ना रहा। कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर तीन बड़े कारणों का असर दिखा: पहली, मिनिमम वेज रिवीजन के बाद वेज से जुड़े एडजस्टमेंट, दूसरी, फ्यूल की बढ़ी हुई कीमतें, और तीसरी, हाल ही में एक्वायर की गई Ecom Express के इंटीग्रेशन से जुड़ी लागतें। इन वजहों से कंपनी के टॉप-लाइन परफॉर्मेंस पर भी दबाव पड़ा और शेयरहोल्डर्स के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है।

वॉल्यूम परफॉर्मेंस मजबूत

मुनाफे के दबाव के बावजूद, Delhivery के ऑपरेशनल मेट्रिक्स इसके मुख्य सेगमेंट में अच्छी मांग का संकेत देते हैं। एक्सप्रेस पार्सल सेगमेंट, जो कंपनी के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा है, में वॉल्यूम 55% बढ़ा, जिसके तहत तिमाही में 322 मिलियन शिपमेंट्स को हैंडल किया गया। इसी तरह, पार्ट-ट्रकलोड (PTL) बिजनेस में वॉल्यूम 18% बढ़ा, जिसमें 542,000 मीट्रिक टन कार्गो की हैंडलिंग हुई। यह ग्रोथ मौजूदा ग्राहकों की मांग और नए ग्राहकों के जुड़ने से संभव हुई।

भविष्य का प्लान और मार्जिन रिकवरी

कंपनी के मैनेजमेंट ने पूरे फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अपने अनुमानों को बरकरार रखा है और मार्जिन में सुधार को लेकर भरोसा जताया है। कंपनी ने अपने टारगेट को फिर से कन्फर्म किया है कि वे दूसरी छमाही तक एक्सप्रेस पार्सल सेवाओं के लिए EBITDA मार्जिन 16% से 18% और PTL सेगमेंट के लिए 15% से 15.5% तक पहुंचा देंगे। इस स्ट्रेटेजी में ऑपरेटिंग लीवरेज (जहां वॉल्यूम बढ़ने पर प्रति यूनिट हैंडलिंग की लागत कम हो जाती है) और बेहतर फ्यूल पास-थ्रू मैकेनिज्म पर निर्भरता है, ताकि मार्जिन को वोलेटिलिटी से बचाया जा सके।

बाजार की प्रतिक्रिया और आगे क्या?

13 अगस्त 2026 तक, नतीजों के बाद बाजार की सतर्कता को दर्शाते हुए स्टॉक लगभग ₹467 के आसपास ट्रेड कर रहा था। हालांकि कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने 'बाय' रेटिंग बरकरार रखी है, वहीं कुछ ने FY27 के लिए अपने प्रॉफिट अनुमानों को कम कर दिया है। उनका मानना है कि मार्जिन रिकवरी का रास्ता पहले सोचे गए मुकाबले धीमा हो सकता है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क यह है कि अगर फ्यूल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं या Ecom Express का इंटीग्रेशन उम्मीद से ज्यादा लंबा खिंचता है, तो मुनाफे में अस्थिरता बनी रह सकती है।

आने वाली तिमाहियों में निवेशकों का मुख्य फोकस कंपनी की लगातार मार्जिन बढ़ाने की क्षमता पर रहेगा। बाजार खासतौर पर मैनेजमेंट की सफलता को ट्रैक करेगा कि वे वेज रेगुलेशन्स को कैसे मैनेज करते हैं, इंटीग्रेटेड ऑपरेशन्स को कैसे सुचारू बनाते हैं, और फ्यूल की बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर कितनी प्रभावी ढंग से पास कर पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.