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Delhivery की पहली बार धमाकेदार कमाई! ₹162 करोड़ का मुनाफा, पर हाई वैल्यूएशन और Ecom Integration बनी बड़ी चुनौती

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AuthorMehul Desai|Published at:
Delhivery की पहली बार धमाकेदार कमाई! ₹162 करोड़ का मुनाफा, पर हाई वैल्यूएशन और Ecom Integration बनी बड़ी चुनौती
Overview

लॉजिस्टिक्स कंपनी Delhivery के निवेशकों के लिए बड़ी खबर आई है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025 (FY25) में **₹162 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो कि पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY24) में **₹249 करोड़** के नुकसान से एक बड़ा उलटफेर है। यह कंपनी का पहला फुल-ईयर प्रॉफिट है।

प्रॉफिट में कैसे बदली Delhivery?

Delhivery ने लगातार चौथी तिमाही में मुनाफा दर्ज करते हुए FY25 में ₹162 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है। यह ₹8,932 करोड़ के रेवेन्यू पर हासिल हुआ है। यह सफलता मैनेजमेंट की स्ट्रैटेजी में बदलाव का नतीजा है, जिसने पहले तेज नेटवर्क एक्सपेंशन पर जोर देने के बजाय अब यूनिट इकोनॉमिक्स (Unit Economics) और मार्जिन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसी वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही (Q4 FY25) में कंपनी ने ₹72 करोड़ का मुनाफा कमाया था।

PTL सेगमेंट बना प्रॉफिट का हीरो

कंपनी की बढ़ती प्रॉफिटेबिलिटी का मुख्य कारण उसका Part Truckload (PTL) सेगमेंट है। इस सेगमेंट से पहले जहां ₹46 करोड़ का घाटा हो रहा था, वहीं FY25 में इसने ₹101 करोड़ का प्रॉफिट कमाया है। PTL मार्जिन बढ़कर 5.4% हो गया है। कंपनी ने जानबूझकर कम मार्जिन वाले एक्सप्रेस पार्सल वॉल्यूम को मैनेज किया है, जिससे ओवरऑल कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन सुधरा है।

वैल्यूएशन पर चिंताएं और कॉम्पिटीशन

एक तरफ जहां कंपनी प्रॉफिट कमा रही है, वहीं इसका वैल्यूएशन (Valuation) काफी हाई है। Delhivery का P/E रेश्यो 200x से भी ऊपर (लगभग 204.22x से 230x तक) है, जो सेक्टर के एवरेज 20-22x और Blue Dart Express जैसे कॉम्पिटीटर्स (40-50x P/E) से काफी ज्यादा है। एनालिस्ट्स (Analysts) ने औसतन ₹523 का टारगेट प्राइस दिया है, जो काफी उम्मीदें दिखाता है।

Ecom Express इंटीग्रेशन और अन्य जोखिम

सबसे बड़ी चुनौती Ecom Express के इंटीग्रेशन (Integration) को लेकर है, जिसे कंपनी ने लगभग ₹1,407 करोड़ में खरीदा है। शुरुआती इंटीग्रेशन कॉस्ट ₹300 करोड़ के अनुमान से कम रहने की उम्मीद है, लेकिन सिनर्जी (Synergies) हासिल करना और किसी भी तरह की रुकावट को मैनेज करना क्रिटिकल होगा। इसके अलावा, कंपनी पर कर्ज (Debt) और फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) में भी बढ़ोतरी देखी गई है।

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