Amazon के ₹2,800 करोड़ के निवेश पर Delhivery CEO का तंज!
भारत के तेजी से बढ़ते लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक बड़ी रणनीतिक भिड़ंत देखने को मिल रही है। Delhivery के CEO Sahil Barua ने सीधे तौर पर ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon की एक बड़ी पहल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Amazon India अपने लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस को बढ़ावा देने के लिए ₹2,800 करोड़ का भारी निवेश कर रही है। इस निवेश का मकसद फुलफिलमेंट सेंटर्स, सॉर्टेशन हब्स और डिलीवरी स्टेशंस का विस्तार करना है, साथ ही 'Amazon Now' जैसी क्विक कॉमर्स सर्विस को बेहतर बनाना है। इस कदम का लक्ष्य डिलीवरी की गति बढ़ाना और छोटे शहरों तक अपनी पहुंच का विस्तार करना है।
CEO बरुआ के संदेह: प्राथमिकताएं और बाहरी सेलर्स का क्या होगा?
Amazon के इस विस्तार के बीच, Delhivery के CEO Sahil Barua ने Amazon द्वारा बाहरी सेलर्स को अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का उपयोग करने देने की योजना पर संदेह जताया है। Barua ने इस ऑफर को 'सतही रीपैकेजिंग' करार दिया और इसके आर्थिक औचित्य और ऑपरेशनल फेयरनेस पर सवाल उठाए, खासकर शिपमेंट प्राथमिकता को लेकर।
CEO बरुआ का यह आलोचनात्मक रवैया लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के निर्माण के तरीके से उपजा है। उनका मानना है कि एक ऐसा नेटवर्क जो मुख्य रूप से अपने स्वयं के रिटेल बिजनेस के लिए बनाया गया है, वह हमेशा अपने फर्स्ट-पार्टी ऑर्डर्स को प्राथमिकता देगा, खासकर मुश्किल लास्ट-माइल डिलीवरी के दौरान। इससे बाहरी सेलर्स के लिए एक निष्पक्ष सेवा और गारंटीड प्राथमिकता की मांग में टकराव पैदा हो सकता है।
Delhivery के नतीजे: रेवेन्यू बढ़ा, प्रॉफिट घटा
जहां Amazon अपनी ताकत बढ़ा रही है, वहीं Delhivery ने अपनी चौथी तिमाही के नतीजे पेश किए। कंपनी के ऑपरेशंस से रेवेन्यू 30% बढ़कर ₹2,850 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की तुलना में काफी अच्छी ग्रोथ है। हालांकि, नेट प्रॉफिट में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.2% की मामूली गिरावट आई और यह ₹72.4 करोड़ रहा। इस मिश्रित वित्तीय प्रदर्शन के बीच, Delhivery का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹35,600 करोड़ है, जो इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बाजार में निवेशकों के नजरिए को दर्शाता है।
बाजार का हाल और Delhivery की चुनौती
भारत का ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स मार्केट 2030 तक $7.85 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 12.18% की सालाना दर से बढ़ रहा है। इस बाजार में Amazon और Flipkart जैसे बड़े ई-कॉमर्स खिलाड़ियों की इन-हाउस लॉजिस्टिक्स सेवाएं और Delhivery और Ecom Express जैसे प्रमुख थर्ड-पार्टी प्रोवाइडर्स का दबदबा है।
Delhivery, FY24 में रेवेन्यू के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स फर्म के रूप में खुद को पेश करती है, जो कई क्लाइंट्स को निष्पक्ष सेवा प्रदान करती है। Amazon की रणनीति अपने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल अधिक मार्केट पार्टिसिपेशन के लिए करना है।
हालांकि, Delhivery कुछ वित्तीय मेट्रिक्स पर सवालों का सामना कर रही है। कंपनी 1.34%-1.87% का कम रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और 2.82% का रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) दिखाती है। Delhivery कोई डिविडेंड (Dividend) नहीं देती है। इसका हाई प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो, जो 152x से 245x TTM के बीच है, बताता है कि इसका वैल्यूएशन पहले से ही भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदों को दर्शाता है। Q4 नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल मामूली गिरावट मार्जिन पर दबाव और इस सेक्टर में कड़ी प्राइसिंग और उच्च ऑपरेशनल लागतों को और बढ़ाती है।
Amazon का विशाल आकार एक बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती पेश करता है। Barua भले ही प्राथमिकताओं पर सवाल उठाएं, लेकिन Amazon का इंटीग्रेटेड नेटवर्क उन लागत बचतों और कुशलताओं की पेशकश कर सकता है जिनसे केवल थर्ड-पार्टी प्रोवाइडर्स जूझते हैं। Amazon अपने प्लेटफॉर्म की प्रमुखता का उपयोग व्यापारियों को अपनी लॉजिस्टिक्स सेवाओं की ओर मोड़ने के लिए कर सकती है, संभवतः कम दरों पर, जो Delhivery जैसी कंपनियों के लिए खतरा पैदा करता है।
विश्लेषकों की राय और बाजार की उम्मीदें
इन चुनौतियों के बावजूद, विश्लेषक Delhivery को लेकर काफी आशावादी बने हुए हैं। आम तौर पर 'स्ट्रॉन्ग बाय' की रेटिंग के साथ, औसत 12-महीने के प्राइस टारगेट ₹527 से ₹545 के बीच हैं, जो संभावित अपसाइड का संकेत देते हैं। ब्रोकरेज फर्म्स ज्यादातर 'बाय' रेटिंग बनाए रखती हैं, जो रेवेन्यू ग्रोथ और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को सकारात्मक मानती हैं, भले ही लाभ में थोड़ी कमी आई हो। भारत के लॉजिस्टिक्स मार्केट में ई-कॉमर्स द्वारा संचालित महत्वपूर्ण वृद्धि की उम्मीद है। अनुमानों के अनुसार, FY25 के माध्यम से ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स रेवेन्यू में 23.6% की CAGR और 2030 तक समग्र बाजार $360 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। यह ग्रोथ अवसर प्रदान करती है, लेकिन Amazon जैसे इंटीग्रेटेड खिलाड़ियों से तीव्र प्रतिस्पर्धा रणनीतियों को आकार देना जारी रखेगी।