दिल्ली का बहुप्रतीक्षित Barapullah Phase-III प्रोजेक्ट उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद गंभीर ट्रैफिक समस्याओं से जूझ रहा है। **₹1,635 करोड़** की लागत और **12 साल** के लंबे इंतजार के बाद शुरू हुआ यह कॉरिडोर डिजाइन मिसमैच के कारण ट्रैफिक का अड्डा बन गया है।
दिल्ली का Barapullah Phase-III कॉरिडोर, जो 29 सितंबर 2026 को जनता के लिए खोला गया था, अब शहर के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन गया है। ₹1,635 करोड़ के निवेश और 12 साल की मेहनत के बावजूद, यह प्रोजेक्ट अपनी उपयोगिता साबित करने में नाकाम दिख रहा है।
क्या है असली समस्या?
मुख्य समस्या डिजाइन की है। 8 से 9 लेन का ट्रैफिक एक साथ आकर पुराने फ्लाईओवर के 3-लेन वाले हिस्से में समा रहा है। इस 'बॉटलनेक' (bottleneck) के कारण गाड़ियों की लंबी कतारें लग रही हैं और कम्यूटर्स का घंटों का समय बर्बाद हो रहा है।
क्या है प्रशासन का प्लान?
स्थिति को संभालने के लिए पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अब युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। खबरों के मुताबिक, गुरुद्वारा बाला साहिब के पास एक नया 'यू-टर्न' बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही, आईटीओ (ITO) से सराय काले खां के बीच रिंग रोड के फुटपाथों को री-डिजाइन कर सड़क चौड़ी करने पर विचार किया जा रहा है ताकि लेन की क्षमता को बढ़ाया जा सके।
टेक्नोलॉजी की भी चुनौती
इस अव्यवस्था के बीच Google Maps जैसे नेविगेशन प्लेटफॉर्म भी ट्रैफिक का सही आकलन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे लोग अनजाने में जाम वाले रास्तों पर फंस रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अक्सर समय के साथ शहरी विकास और ट्रैफिक का दबाव डिजाइन से आगे निकल जाता है, जिसके लिए अब सरकार को भारी-भरकम बदलाव करने पड़ रहे हैं।
