प्रोजेक्ट का दायरा और वित्तीय चुनौतियां
दिल्ली मेट्रो के फेज़ V(b) के तहत 7 नए कॉरिडोर पर 97 किलोमीटर का विस्तार किया जाएगा, जिसमें 65 नए स्टेशन शामिल होंगे। इस परियोजना पर अनुमानित ₹48,204.56 करोड़ का भारी निवेश किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के बाहरी इलाकों तक मेट्रो की पहुंच बढ़ाना और यात्रा समय को कम करना है।
DMRC की वित्तीय स्थिति पर सवाल
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) पर पहले से ही काफी कर्ज़ है और हाल के वर्षों में कंपनी को घाटा भी हुआ है। 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में DMRC का रेवेन्यू ₹8,150 करोड़ रहा, लेकिन कंपनी पर मौजूदा देनदारियां और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) जैसी संस्थाओं से लिए गए लोन का भुगतान जारी है। कोविड-19 महामारी ने भी कंपनी की वित्तीय स्थिति को और कमजोर किया है। दिल्ली सरकार ने FY27 के ट्रांसपोर्ट बजट में मेट्रो विस्तार के लिए ₹2,885 करोड़ आवंटित किए हैं, जो इस प्रोजेक्ट के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
लागत का अनुमान और पिछले प्रोजेक्ट्स का सबक
फेज़ V(b) में एलिवेटेड (ऊंचाई पर) सेक्शन के लिए प्रति किलोमीटर ₹250-300 करोड़ और अंडरग्राउंड (भूमिगत) सेक्शन के लिए ₹500-600 करोड़ तक की लागत आ सकती है। पिछले मेट्रो प्रोजेक्ट्स, जैसे कि दिल्ली मेट्रो के फेज़ IV में भी देरी और लागत में करीब 15% की बढ़ोतरी देखी गई थी। फेज़ V(b) का महत्वाकांक्षी स्वरूप, जिसमें अधिक टनलिंग और निर्माण कार्य शामिल है, भूवैज्ञानिक समस्याओं, भूमि अधिग्रहण में देरी और बढ़ती सामग्री व श्रम लागत जैसी चुनौतियों से भरा हो सकता है, जिससे बजट में अप्रत्याशित वृद्धि की आशंका है।
प्राथमिकता वाले कॉरिडोर और भविष्य की राह
योजना के तहत 7 कॉरिडोर में से 4 को 2029 तक पूरा करने की प्राथमिकता दी गई है, जिनका लक्ष्य नजफगढ़, नरेला और मिठापुर जैसे इलाकों को जोड़ना है। इन नई लाइनों से रियल एस्टेट विकास और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालाँकि, DMRC की वित्तीय स्थिरता, जो पहले से ही घाटे और लोन से प्रभावित है, पर इस बड़े विस्तार से और दबाव बढ़ेगा। हाल ही में अगस्त 2025 में औसतन 7% की किराया वृद्धि, कंपनी की वित्तीय दिक्कतों को उजागर करती है। 2029 तक पहले 4 प्राथमिकता वाले कॉरिडोर को पूरा करने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और इसमें और देरी की संभावना है, जिससे कुल लागत बढ़ सकती है। इन चुनौतियों के बावजूद, यह विस्तार दिल्ली की शहरी गतिशीलता को बढ़ाने और संतुलित विकास को बढ़ावा देने का वादा करता है, लेकिन इसके सफल कार्यान्वयन के लिए मजबूत निगरानी और वित्तीय प्रबंधन आवश्यक होगा।
