10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो में यात्रियों की संख्या गिरकर **32 लाख** रह गई, जो सामान्य दिनों के **58 लाख** के आंकड़े से काफी कम है। विरोध-प्रदर्शनों के चलते सुरक्षा प्रतिबंधों ने मेट्रो के ऑपरेशंस और कमाई पर गहरा असर डाला है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में बताया कि 10 अक्टूबर को विरोध-प्रदर्शनों के कारण यात्रियों की संख्या में भारी कमी आई। आम तौर पर शनिवार को जहां 58 लाख यात्री सफर करते हैं, वहीं उस दिन यह आंकड़ा सिमटकर 32 लाख रह गया। यह स्थिति दर्शाती है कि कैसे सार्वजनिक बुनियादी ढांचा नागरिक अशांति के प्रति कितना संवेदनशील है।
ऑपरेशनल और फाइनेंशियल असर
DMRC ने अपनी 4,157 दैनिक ट्रेन ट्रिप्स को जारी रखा, लेकिन यात्रियों की कमी ने ऑपरेशनल कॉस्ट पर दबाव बना दिया है। बिजली की खपत और स्टाफ का खर्च फिक्स होने के कारण, कम यात्रियों के बावजूद सेवाएं चलाए रखने से प्रति यात्री लागत बढ़ गई है। टिकट बिक्री से होने वाली कमाई पर भी सीधा असर पड़ा है, जो मेट्रो ऑपरेटर के लिए अपने कर्ज (Debt) को चुकाने का मुख्य जरिया है।
स्टेशन और सुरक्षा प्रबंध
सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 303 में से 45 स्टेशनों को बंद करना पड़ा था। हालांकि, यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए सभी 14 बड़े इंटरचेंज हब खुले रखे गए।
रेग्युलेटरी संदर्भ
कानूनी पेचीदगियां भी बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को निर्देश दिया था कि मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बंद न हों। पुलिस ने पहले 57 स्टेशन बंद करने की मांग की थी, जिसे बातचीत के जरिए 45 तक सीमित किया गया। अब कोर्ट यह देख रही है कि कैसे नागरिक अशांति का असर सार्वजनिक परिवहन और आवश्यक सेवाओं पर पड़ रहा है।
