दिल्ली में ATF वैट (VAT) में कटौती की सुगबुगाहट
दिल्ली सरकार एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर अपने 25% वैट (VAT) की दर को कम करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब महाराष्ट्र ने हाल ही में अपने ATF वैट (VAT) में 11% अंकों की भारी कटौती करके इसे 7% कर दिया है। इस कदम का मुख्य मकसद एयरलाइन्स के भारी-भरकम ऑपरेटिंग कॉस्ट को कम करना है, जो ग्लोबल फ्यूल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण बढ़ रही हैं।
क्यों हो रही है कटौती की बात?
फिलहाल, दिल्ली में ATF पर 25% वैट (VAT) की दर देश के अधिकांश राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा है। इससे राजधानी अन्य राज्यों की तुलना में एयरलाइन्स के लिए कम आकर्षक हो गई है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में नए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ATF पर केवल 1% वैट (VAT) लगता है। महाराष्ट्र के फैसले के बाद, मुंबई अब दिल्ली के मुकाबले फ्यूलिंग के लिए एक सस्ता विकल्प बन गया है, जिससे दिल्ली पर अपनी टैक्स पॉलिसी पर पुनर्विचार करने का दबाव बढ़ गया है।
राज्यों के बीच एयरलाइन्स को लुभाने की होड़
भारतीय राज्यों के बीच एयरलाइन्स को आकर्षित करने के लिए टैक्स कम करने की प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। गुजरात पहले से ही ATF पर 5% वैट (VAT) की कम दर प्रदान कर रहा है, जबकि गोवा 8% चार्ज करता है। इन कम टैक्स दरों का उद्देश्य एयरलाइन्स को आकर्षित करना और विमानन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। दिल्ली का प्रस्तावित कदम भी इसी व्यापक चलन का हिस्सा है, क्योंकि राज्य अधिक आकर्षक एविएशन हब बनने के लिए अपनी टैक्स संरचनाओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।
एयरलाइन्स बढ़ती लागत से जूझ रही हैं
एयरलाइन्स के लिए, ईंधन की लागत एक बड़ा खर्च है, जो उनके कुल ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस का 55% से 60% तक होती है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइन्स (FIA) ने चेतावनी दी है कि इन बढ़ती लागतों से यह सेक्टर गंभीर दबाव में आ गया है, क्योंकि एयरलाइन्स इन खर्चों का पूरा बोझ यात्रियों पर नहीं डाल सकतीं। जहां भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo अच्छी वित्तीय स्थिति में है, वहीं SpiceJet जैसी अन्य कंपनियां अभी भी वित्तीय कठिनाइयों से जूझ रही हैं।
क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों का असर
रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे भू-राजनीतिक तनावों के कारण क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें लगातार $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर ATF की लागत पर पड़ता है। तेल की कीमतों में पिछली बार हुई भारी वृद्धि ने ऐतिहासिक रूप से एयरलाइन स्टॉक की कीमतों में गिरावट ला दी थी; उदाहरण के लिए, जब ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) मार्च 2026 की शुरुआत में $100 से ऊपर चला गया था, तो IndiGo और SpiceJet के शेयरों में 8% तक की गिरावट आई थी। इसके विपरीत, तेल की कीमतों में गिरावट अक्सर शेयरों में बढ़त लाती है।
टैक्स राहत के बावजूद जोखिम बने हुए हैं
प्रस्तावित वैट (VAT) कटौती के बावजूद, महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र की 7% दर केवल 14 नवंबर 2026 तक ही अस्थायी रूप से लागू है। एयरलाइन्स को संरचनात्मक मुद्दों का भी सामना करना पड़ता है, जैसे कि ATF का गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) ढांचे से बाहर होना। इस बहिष्करण के कारण वे इनपुट टैक्स क्रेडिट (input tax credit) का दावा नहीं कर सकतीं, जो कई अन्य उद्योगों को मिलने वाले लाभ से उन्हें वंचित रखता है। बढ़ती ईंधन लागत को मूल्य-संवेदनशील उपभोक्ताओं पर डालने की मूल समस्या अभी भी बनी हुई है।
सेक्टर की स्थिरता पर एनालिस्ट्स (Analysts) की राय
एनालिस्ट्स (Analysts) का सुझाव है कि जबकि राज्य-स्तरीय टैक्स कटौती से कुछ तत्काल राहत मिल सकती है, मुख्य चिंता वैश्विक ऊर्जा बाजारों द्वारा संचालित उच्च ATF कीमतों की है। सेक्टर का दीर्घकालिक दृष्टिकोण स्थिर वैश्विक ऊर्जा कीमतों, राज्यों द्वारा टैक्स राहत जारी रखने और एयरलाइन्स की अपनी लागतों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की क्षमता पर निर्भर करता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ATF को जीएसटी (GST) व्यवस्था के तहत शामिल करना उद्योग की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक है, जिससे एक समान कराधान और इनपुट टैक्स क्रेडिट (input tax credit) की सुविधा मिलेगी।