दिल्ली सरकार ने ट्रैफिक और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ई-रिक्शा की संख्या को **2.5 लाख** तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। अब ई-रिक्शा ऑपरेटर्स के लिए डिजिटल कंप्लायंस सर्टिफिकेट और ओनरशिप की नई शर्तें लागू होंगी।
दिल्ली सरकार ने 'E-Rickshaw (Registration and Operation) Scheme 2026' का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा की बेलगाम बढ़ती संख्या को नियंत्रित करना है। अब राजधानी में केवल 2.5 लाख ई-रिक्शा ही पंजीकृत किए जा सकेंगे।\n\n### नए नियमों की बारीकियां\nप्रत्येक ऑपरेटर को 2 साल के लिए वैध डिजिटल 'ई-रिक्शा कंप्लायंस सर्टिफिकेट' (ECC) लेना अनिवार्य होगा। इसमें ड्राइवर का लाइसेंस, इंश्योरेंस और पब्लिक सर्विस व्हीकल बैज जैसी जानकारी लिंक होगी। बिना इस सर्टिफिकेट के ई-रिक्शा का संचालन अवैध माना जाएगा।\n\n### ओनरशिप और लाइसेंस के कड़े नियम\nसरकार ने ओनरशिप कैपिंग भी लागू कर दी है:\n* व्यक्तिगत मालिकों के लिए: अधिकतम 5 वाहन।\n* कॉर्पोरेट, एनजीओ और को-ऑपरेटिव्स के लिए: अधिकतम 100 वाहन।\n* यदि कोई एंटिटी 25 से ज्यादा वाहन मैनेज करती है, तो उन्हें अब आधिकारिक एग्रीगेटर लाइसेंस लेना होगा।\n\nसाथ ही, बड़े ऑपरेटर्स को अब अपने पास चार्जिंग या बैटरी-स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार रखना होगा, जिससे उनका कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) बढ़ सकता है।\n\n### फाइनेंस सेक्टर पर असर\nयह कदम ई-रिक्शा इकोसिस्टम के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। व्यवस्थित नियम होने से फाइनेंसर्स और एनबीएफसी (NBFCs) का रिस्क कम होगा, जिससे भविष्य में ई-रिक्शा के लिए लोन मिलना आसान हो सकता है। फिलहाल, सरकार ने इस पर 30 दिन के लिए जनता से सुझाव मांगे हैं।
