Delhi International Airport अपने ट्रांजिट यात्रियों के लिए सुरक्षा स्क्रीनिंग को सरल बनाने के लिए रेगुलेटर्स से बातचीत कर रहा है। एयरपोर्ट का कुल **30%** से ज्यादा ट्रैफिक ट्रांजिट यात्रियों का है, और यह कदम उनकी सुविधा और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है।
सुरक्षा और सुविधा का तालमेल
दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आने वाले 30% से 35% यात्री ट्रांजिट वाले होते हैं। एयरपोर्ट ऑपरेटर अब सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए चेक-इन और ट्रांजिट प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश कर रहा है। सितंबर 2026 की सुरक्षा घटना के बाद नियमों को कड़ा कर दिया गया था, लेकिन अब यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने पर फोकस किया जा रहा है। ये बदलाव पूरी तरह से रेगुलेटरी अप्रूवल पर निर्भर करेंगे।
फाइनेंशियल मजबूती और रेटिंग
ऑपरेटर ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने डॉलर के कर्ज के जोखिम को कम करने के लिए $522.6 मिलियन के कर्ज को रिफाइनेंस किया है। इसके लिए ₹3,500 करोड़ के 15-year नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स जारी किए गए हैं। इसी बेहतर फाइनेंशियल मैनेजमेंट के चलते S&P Global Ratings ने कंपनी की लॉन्ग-टर्म क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड कर 'BB+' कर दिया है।
क्षमता विस्तार और चुनौतियां
एयरपोर्ट अपनी सालाना क्षमता को 106 मिलियन से बढ़ाकर 125 मिलियन पैसेंजर्स करने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। हालांकि, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से भविष्य में ट्रैफिक डायवर्जन का रिस्क भी बना हुआ है। ऐसे में एयरपोर्ट का मार्केट शेयर बनाए रखना उसकी कैपेसिटी एक्सपेंशन और रेगुलेटरी माहौल पर निर्भर करेगा।
