दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने अगले 10 सालों के लिए एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत, 2032 तक एयरपोर्ट की सालाना पैसेंजर क्षमता को बढ़ाकर 125 मिलियन करने का लक्ष्य है। साल 2030 तक 116 मिलियन पैसेंजर की क्षमता हासिल करने की भी योजना है। इसके साथ ही, एयरपोर्ट ₹3,550 करोड़ का बॉन्ड जारी कर अपने कर्ज को मैनेज करेगा और नोएडा में नए खुले इंटरनेशनल एयरपोर्ट से प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार रहेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश
DIAL, जो GMR ग्रुप का हिस्सा है, ने अगले दशक के लिए अपनी योजनाओं का खुलासा किया है। इस मास्टर प्लान का मुख्य उद्देश्य बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को पूरा करना है। इसी कड़ी में, टर्मिनल 3 (T3) में पीयर E का निर्माण किया जाएगा, जो अप्रैल 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है। इस नए प्रोजेक्ट से एयरपोर्ट की सालाना क्षमता में 10 मिलियन पैसेंजर की बढ़ोतरी होगी। पिछले कुछ समय में एयरपोर्ट पर पैसेंजर ट्रैफिक में लगातार इजाफा देखा गया है। जुलाई 2026 में ही 6 मिलियन पैसेंजर ने यात्रा की थी। वहीं, इस फाइनेंशियल ईयर में जुलाई तक 26.4 मिलियन पैसेंजर एयरपोर्ट से गुजर चुके हैं। भविष्य की ट्रैफिक के अनुमानों के आधार पर चौथे टर्मिनल और ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर (APM) सिस्टम जैसे अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी विचार किया जा रहा है।
कर्ज प्रबंधन और फाइनेंसिंग
DIAL अपने लंबे समय के लक्ष्यों को हासिल करने और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए अपने कर्ज को कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कंपनी ₹3,550 करोड़ का बॉन्ड जारी करने की योजना बना रही है, जिसकी अवधि 15 साल होगी। इस बॉन्ड का मुख्य उद्देश्य मौजूदा डॉलर-डोमिनेटेड कर्ज को रीफाइनेंस करना है। यानी, विदेशी मुद्रा के कर्ज को रुपये के बॉन्ड से बदलना। ऐसा करने से कंपनी को करेंसी के उतार-चढ़ाव के जोखिमों को कम करने और भुगतान में लचीलापन लाने में मदद मिलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी और मजबूत बैलेंस शीट मैनेजमेंट बहुत जरूरी है।
कॉम्पिटिशन का माहौल
जहां एक ओर DIAL अपनी क्षमता बढ़ाने और एक प्रमुख हब के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, वहीं हाल ही में जून 2026 में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चालू होने से एनसीआर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। यह नया एयरपोर्ट इस क्षेत्र में ट्रैफिक के लिए एक कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश करेगा। DIAL की विस्तार योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या वह इस नई प्रतिस्पर्धा के बावजूद अपने ट्रैफिक ग्रोथ को बनाए रख पाता है और अपेक्षित क्षमता का उपयोग कर पाता है। निवेशक और स्टेकहोल्डर्स प्रोजेक्ट के समय पर पूरा होने, बॉन्ड जारी होने के ब्याज लागत पर असर और दोनों बड़े एयरपोर्ट्स के बीच ट्रैफिक डिमांड के बंटवारे पर बारीकी से नजर रखेंगे।
