Delhi Airport Traffic: उद्योग के विपरीत दिल्ली एयरपोर्ट पर जून में **6.8%** की बड़ी बढ़ोतरी!

TRANSPORTATION
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Delhi Airport Traffic: उद्योग के विपरीत दिल्ली एयरपोर्ट पर जून में **6.8%** की बड़ी बढ़ोतरी!

दिल्ली एयरपोर्ट ने जून 2026 में राष्ट्रीय एविएशन (Aviation) के धीमेपन को मात देते हुए यात्री यातायात में **6.8%** की वृद्धि दर्ज की है, जबकि देश के अन्य प्रमुख एयरपोर्ट पर गिरावट देखी गई। **65.79 लाख** यात्रियों की संख्या इस बात का संकेत देती है कि राष्ट्रीय राजधानी की ओर यात्रा की मांग बढ़ी है, जबकि भारतीय एविएशन सेक्टर में कुल **2%** की गिरावट आई है।

अकेले दिल्ली एयरपोर्ट ने दर्ज की ग्रोथ

जून 2026 में, दिल्ली एयरपोर्ट भारत का एकमात्र प्रमुख एविएशन हब (Aviation Hub) रहा जिसने यात्री संख्या में सालाना (Year-on-Year) ग्रोथ दर्ज की। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (Airports Authority of India) के आंकड़ों के अनुसार, इस एयरपोर्ट पर 65.79 लाख यात्रियों ने सफर किया, जो जून 2025 के 61.63 लाख के आंकड़े से ज्यादा है। यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के एविएशन सेक्टर में कुल मिलाकर लगभग 2% की गिरावट आई और कुल यात्री यातायात 3.34 करोड़ पर आ गया।

अन्य एयरपोर्ट्स पर दबाव

जहां दिल्ली में यात्रियों की संख्या बढ़ी, वहीं मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे अन्य बड़े एयरपोर्ट्स पर पिछले साल की तुलना में कम यात्रियों ने यात्रा की। खास तौर पर हैदराबाद और चेन्नई में क्रमशः 12.9% और 12.7% की बड़ी गिरावट देखी गई। यह आंकड़े बताते हैं कि भले ही क्षेत्रीय यात्रा की मांग कम हो रही हो, लेकिन दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह के यात्रियों को आकर्षित कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में भी दिल्ली आगे

दिल्ली एयरपोर्ट का जलवा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी दिखा। यह देश का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गेटवे बना रहा और विदेशी यात्रियों के यातायात में भी ग्रोथ दर्ज करने वाला अकेला बड़ा एयरपोर्ट साबित हुआ। इसके विपरीत, मुंबई और बेंगलुरु जैसे एयरपोर्ट्स पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या घटी, वहीं हैदराबाद और चेन्नई में इस सेगमेंट में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

निवेशकों के लिए संकेत

एयरपोर्ट्स के इस मिले-जुले प्रदर्शन से निवेशकों को भारतीय एविएशन सेक्टर की मौजूदा स्थिति का अंदाजा मिलता है। ज्यादातर बड़े एयरपोर्ट्स पर गिरावट यह संकेत दे सकती है कि कोरोना महामारी के बाद की यात्रा की मांग में कमी आ रही है या लोगों के खर्च करने के पैटर्न में बदलाव आया है। क्षेत्रीय आर्थिक स्थिति, फ्लाइट कनेक्टिविटी और एयरलाइंस की सीटों की उपलब्धता जैसे कारक इन उतार-चढ़ावों को प्रभावित करते हैं।

आगे क्या?

अब सेक्टर के लिए यह देखना अहम होगा कि यह गिरावट एक छोटी अवधि का चलन है या एक स्थायी समस्या। निवेशक आने वाले महीनों में यात्री यातायात के आंकड़ों पर नजर रखेंगे कि क्या छोटे एयरपोर्ट्स में सुधार होता है या दिल्ली जैसे बड़े हब की ओर यात्रियों का जमावड़ा जारी रहता है। इसके अलावा, प्रमुख एयरलाइंस द्वारा सीटों की उपलब्धता (Capacity Deployment) पर भी नजर रखनी होगी, क्योंकि एयरलाइंस अक्सर मौसमी मांग और लागत दक्षता के आधार पर अपने फ्लाइट शेड्यूल में बदलाव करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.