दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने केशव पुरम और रोहिणी सेक्टर 34 के बीच 16.5 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर कॉरिडोर के लिए एक फésétasibility स्टडी शुरू कर दी है। इस प्रोजेक्ट में ऊपर मेट्रो लाइन और नीचे सड़क वाला फ्लाईओवर बनाने की योजना है, जिससे ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।
ट्रैफिक जाम से मिलेगी निजात?
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) राष्ट्रीय राजधानी में ट्रैफिक जाम को कम करने के उद्देश्य से एक इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए फिजिबिलिटी स्टडी (Feasibility Study) शुरू कर चुका है। इस प्रस्ताव में केशव पुरम और रोहिणी सेक्टर 34 के बीच 16.5 किलोमीटर की दूरी तय करने वाले एक डबल-डेकर ढांचे का निर्माण शामिल है। इस अनोखे डिजाइन का मकसद ऊपर की डेक पर मेट्रो लाइन और नीचे की डेक पर एक रोड फ्लाईओवर (Road Flyover) बनाना है। यह कॉन्सेप्ट घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में जगह के सीमित होने पर काफी हद तक स्पेस को ऑप्टिमाइज़ (Optimize) कर सकता है।
कंसल्टेंसी पर इतना खर्च
DMRC ने इस कंसल्टेंसी फेज (Consultancy Phase) के लिए लगभग ₹2.08 करोड़ का बजट रखा है, जिसकी समय-सीमा छह महीने है। नियुक्त कंसल्टेंट (Consultant) मौजूदा और भविष्य की परिवहन जरूरतों का आकलन करने के लिए विस्तृत ट्रैफिक सर्वे (Traffic Survey), टर्निंग मूवमेंट काउंट (Turning Movement Counts) और ओरिजिन-डेस्टिनेशन स्टडी (Origin-Destination Studies) करेगा। चूंकि यह रूट स्थापित इलाकों से होकर गुजरेगा, इसलिए स्टडी में मौजूदा यूटिलिटीज (Utilities), फ्लाईओवरों और अन्य संरचनात्मक बाधाओं को भी ध्यान में रखना होगा, जो कंस्ट्रक्शन टाइमलाइन (Construction Timeline) और बजट को प्रभावित कर सकती हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोनॉमी पर असर
इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और इकोनॉमी (Economy) के नजरिए से, यह स्टडी DMRC के संभावित फेज V(B) विस्तार का एक महत्वपूर्ण कदम है। बेसिक इंजीनियरिंग (Basic Engineering) से परे, रिपोर्ट में कॉस्ट-बेनिफिट एनालिसिस (Cost-Benefit Analysis) और शुरुआती एनवायर्नमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (Environmental Impact Assessment) शामिल होगा। कंसल्टेंट से रैंप (Ramps) और लूप्स (Loops) जैसे सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कंसेप्चुअल प्लान (Conceptual Plans) तैयार करने की उम्मीद है, जो फ्लाईओवर को मौजूदा रोड नेटवर्क से जोड़ने के लिए आवश्यक होंगे।
मार्केट की निगाहें
मार्केट पार्टिसिपेंट्स (Market Participants) और इंफ्रास्ट्रक्चर ऑब्ज़र्वर्स (Infrastructure Observers) के लिए, मुख्य रुचि इस बात में है कि DMRC कंस्ट्रक्शन कॉस्ट (Construction Cost) और ट्रांसपोर्ट एफिशिएंसी (Transport Efficiency) से होने वाले अनुमानित लाभ को कैसे संतुलित करता है। हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती प्लानिंग स्टेज (Planning Stage) में है, इसकी सफलता अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले इलाकों में टेक्निकल फिजिबिलिटी (Technical Feasibility) और फंड की अंतिम रूप से उपलब्धता पर निर्भर करेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और इंजीनियरिंग सेक्टरों के निवेशक इस प्रोजेक्ट की प्रगति पर नज़र रखेंगे, क्योंकि यह अधिक जटिल, मल्टी-मोडल (Multi-modal) शहरी परिवहन समाधानों की ओर एक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। अगली बड़ी अपडेट संभवतः अंतिम फिजिबिलिटी रिपोर्ट के जारी होने और सरकार द्वारा औपचारिक प्रोजेक्ट टेंडरिंग (Project Tendering) के साथ आगे बढ़ने के निर्णय पर होगी।
