DGCA का एयरलाइंस पर शिकंजा: 352 नोटिस जारी, 2024-25 में बढ़ी रेगुलेटरी सख्ती!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
DGCA का एयरलाइंस पर शिकंजा: 352 नोटिस जारी, 2024-25 में बढ़ी रेगुलेटरी सख्ती!
Overview

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच शेड्यूल कमर्शियल एयरलाइंस को विभिन्न उल्लंघनों के लिए कुल **352** 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notices) जारी किए हैं। IndiGo और Air India को सबसे ज़्यादा नोटिस मिले हैं, जो रेगुलेटरी जांच में बड़ी बढ़ोतरी का संकेत दे रहा है।

DGCA की कड़ी नज़र: एयरलाइंस पर बढ़ी नियमों कीThe Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने एयरलाइन इंडस्ट्री पर अपनी निगरानी काफी बढ़ा दी है। पिछले दो सालों (जनवरी 2024 से दिसंबर 2025) में, DGCA ने कुल 352 शो कॉज नोटिस जारी किए हैं। इनमें भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo को सबसे ज़्यादा 98 नोटिस मिले, जबकि Air India को 84 नोटिस थमाए गए। Air India Express और SpiceJet भी जांच के दायरे में रहे, जिन्हें क्रमशः 65 और 45 नोटिस मिले। यह दिखाता है कि DGCA नियमों के पालन को लेकर पहले से कहीं ज़्यादा सख्त हो गया है। इन 352 नोटिसों में से 139 मामलों में एयरलाइंस पर पेनल्टी लगाई गई, जबकि 113 मामलों में चेतावनी दी गई। केवल सात एयरलाइंस ही ऐसे जवाब दे पाईं कि नोटिस बिना किसी आगे की कार्रवाई के बंद कर दिए गए।

बेड़े के स्वास्थ्य पर भी DGCA की पैनी नज़र

नियमों के उल्लंघन के अलावा, DGCA अब एयरलाइंस के बेड़े (fleet) के स्वास्थ्य पर भी बारीकी से नज़र रख रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच, छह प्रमुख एयरलाइंस के 754 में से 377 विमानों में बार-बार तकनीकी खराबी पाई गई। Air India Group के 267 में से 191 विमानों (लगभग 72%) में ऐसी दिक्कतें पाई गईं, हालांकि कंपनी का कहना है कि ये ज़्यादातर केबिन इंटीरियर जैसी नॉन-क्रिटिकल (Category D) दिक्कतें हैं। IndiGo के 405 में से 148 विमानों में भी खराबी मिली। SpiceJet के 43 में से 16 और Akasa Air के 32 में से 14 विमानों में भी ऐसे इशू रिपोर्ट हुए। यह दर्शाता है कि एयरलाइंस को मेंटेनेंस के मामले में अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए DGCA ने अपनी तकनीकी टीम को भी मजबूत किया है।

बाज़ार का नज़रिया और वित्तीय असर

यह सब तब हो रहा है जब भारतीय एविएशन सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन साथ ही दबाव में भी है। 2026 तक सेक्टर को सुरक्षा घटनाओं, साइबर खतरों और ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते ₹17,000–18,000 करोड़ का बड़ा नेट लॉस झेलने का अनुमान है। IndiGo जैसी लिस्टेड कंपनियों के लिए, ₹22.2 करोड़ की पेनल्टी (दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन के लिए) को एनालिस्ट्स ने मामूली माना है, जो उनके अनुमानित प्रॉफिट का लगभग 0.31% है। IndiGo के शेयर मज़बूत बने हुए हैं, जिनका मार्केट कैप फरवरी 2026 तक लगभग ₹1.89 ट्रिलियन और P/E रेश्यो करीब 28.2 था। दूसरी ओर, SpiceJet का मार्केट कैप करीब ₹3,382 करोड़ है और P/E रेश्यो नेगेटिव है, जो लगातार नुकसान का संकेत देता है। IndiGo की 60-65% मार्केट शेयर के साथ, सेक्टर में उसकी स्थिति काफी मज़बूत है।

सबसे बुरा नज़रिया: बढ़ते खर्च और ऑपरेशनल रिस्क

DGCA की बढ़ी हुई निगरानी और एयरलाइंस की बेड़े से जुड़ी दिक्कतों को देखते हुए, एविएशन सेक्टर के लिए एक 'बीयर केस' (Bear Case) भी मौजूद है। भारी संख्या में जारी किए गए नोटिस बताते हैं कि पायलट्स के लिए संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन्स (FTL) जैसे बदलते नियमों का पालन करना एयरलाइंस के लिए एक जटिल और महंगा काम बनता जा रहा है। IndiGo द्वारा दिसंबर 2025 में FTL फेज़ 2 नियमों का पालन न करने की वजह से 10% शेड्यूल कट और ₹50 करोड़ की बैंक गारंटी की ज़रूरत पड़ी, जो एग्जीक्यूशन फेल होने के बड़े परिणाम दिखाता है। Air India Group की 72% फ्लीट में बार-बार खराबी पाई जाना, उनकी मेंटेनेंस स्ट्रैटेजी पर सवाल खड़े करता है। वहीं, SpiceJet जैसी आर्थिक रूप से कमज़ोर एयरलाइंस के लिए, किसी भी अतिरिक्त पेनल्टी या ऑपरेशनल समस्या से उनकी वित्तीय हालत और खराब हो सकती है। ऐसे में, एविएशन सेक्टर के कई अहम पदों पर खाली पड़ी जगहों से यह चिंता भी बढ़ती है कि क्या रेगुलेटर इतनी तेज़ी से बढ़ते सेक्टर पर प्रभावी ढंग से नज़र रख पाएगा।

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