DGCA ने देश में इलेक्ट्रिक विमानों को बढ़ावा देने के लिए अपने CAR-145 मेंटेनेंस नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अब नई तकनीकों के लिए 'B4' और 'C23' जैसी खास कैटेगरी बनाई जाएंगी, जिससे इलेक्ट्रिक एविएशन के लिए एक सुरक्षित इकोसिस्टम तैयार हो सके।
इलेक्ट्रिक एविएशन के लिए नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने अपने Civil Aviation Requirements (CAR-145) नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट पेश किया है। यह कदम भारत में पारंपरिक इंजन तकनीक से इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन की ओर बढ़ते कदम को देखते हुए उठाया गया है।
क्या है 'B4' और 'C23' कैटेगरी का मतलब?
प्रस्ताव के तहत, इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन के लिए एक डेडिकेटेड 'B4' इंजन कैटेगरी बनाई जाएगी। पहले इलेक्ट्रिक इंजन को सामान्य इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स में रखा जाता था, जिससे मेंटेनेंस की प्रक्रिया सीमित थी। अब MRO (Maintenance, Repair, and Overhaul) कंपनियां हाई-वोल्टेज सिस्टम और इलेक्ट्रिक रोटर्स के लिए विशेष सर्टिफिकेशन ले सकेंगी। वहीं, 'C23' कैटेगरी का इस्तेमाल उन एडवांस और एक्सपेरिमेंटल कंपोनेंट्स के लिए किया जाएगा जो अभी तक मौजूदा नियमों में फिट नहीं बैठते थे।
डेटा शेयरिंग और सेफ्टी प्रोटोकॉल पर जोर
नए नियमों के अनुसार, MRO प्रोवाइडर्स को तकनीकी खराबी की जानकारी सीधे मूल निर्माता (Original Manufacturer) के साथ साझा करनी होगी। इससे लोकल रिपेयरिंग के बजाय कंपनी-अप्रूव्ड सर्विस को प्राथमिकता मिलेगी। हालांकि, इससे MRO कंपनियों के लिए अनुपालन (Compliance) का बोझ बढ़ सकता है, लेकिन इससे सेफ्टी स्टैंडर्ड्स में बड़ा सुधार आएगा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
DGCA ने इन प्रस्तावों पर 1 नवंबर, 2026 तक सुझाव मांगे हैं। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वे भारत में इलेक्ट्रिक एविएशन की नींव रख रहे हैं। आने वाले समय में जो MRO कंपनियां इन नई B4-लेवल सर्टिफिकेशन्स को जल्दी हासिल करेंगी, वे ही इस सेक्टर में मार्केट लीडर बनकर उभर सकती हैं। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी सुविधाओं और ट्रेनिंग प्रोसेस को इन नए मानकों के साथ कितनी तेजी से जोड़ती हैं।
