DGCA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में एयरलाइंस के खिलाफ कुल शिकायतों में **31.3%** बैगेज से जुड़ी थीं। डोमेस्टिक एयर ट्रैफिक में **4.8%** की सालाना गिरावट के बीच, ऑपरेशनल मेट्रिक्स दबाव में हैं। जहां IndiGo का दबदबा कायम है, वहीं SpiceJet और Alliance Air जैसी एयरलाइंस में ज्यादा शिकायतें और देरी दरें संचालन जोखिमों को उजागर करती हैं, जो ब्रांड की प्रतिष्ठा और नियामक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।
बैगेज बनी यात्रियों की मुख्य परेशानी
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने जुलाई 2026 के लिए अपना प्रदर्शन रिपोर्ट जारी किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, यात्रियों की असंतुष्टि का मुख्य कारण बैगेज से जुड़ी समस्याएं बन गई हैं। जुलाई में कुल 2,196 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से लगभग 687 शिकायतें, यानी 31.3%, बैगेज की देरी, गुम होने या ठीक से हैंडल न होने से संबंधित थीं। हालांकि इन शिकायतों के समाधान की दर 99.2% रही, लेकिन बैगेज की घटनाओं की यह बड़ी संख्या एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।
एयरलाइंस का प्रदर्शन कैसा रहा?
जुलाई में अलग-अलग एयरलाइंस का प्रदर्शन काफी भिन्न रहा। डोमेस्टिक कैरियर्स में Alliance Air ने प्रति 10,000 यात्रियों पर 65.5 शिकायतों के साथ सबसे ज्यादा शिकायत दर दर्ज की। वहीं, SpiceJet को ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जहां 28.37% उड़ानें दो घंटे से ज्यादा की देरी से चलीं, जो कि सबसे ज्यादा है। निवेशकों के लिए यह देरी दरें महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनसे अक्सर ऑपरेशनल लागत बढ़ती है, नियामक जांच का खतरा बढ़ता है और यात्रियों का भरोसा कम होता है।
इंडिगो का जलवा और बाजार की स्थिति
IndiGo ने जुलाई में 67.4% डोमेस्टिक पैसेंजर ट्रैफिक पर कब्जा जमाए रखते हुए अपनी मार्केट लीडर की स्थिति को और मजबूत किया। हालांकि, एविएशन इंडस्ट्री एक मुश्किल दौर से गुजर रही है, क्योंकि जुलाई में कुल डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक में पिछले साल के मुकाबले 4.8% की गिरावट दर्ज की गई। डिमांड में कमी और ऑपरेशनल दबाव, जैसे बैगेज हैंडलिंग और फ्लाइट में देरी, एयरलाइंस के मुनाफे के लिए जटिल माहौल बना रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
निवेशकों के नजरिए से, ऑपरेशनल स्थिरता लंबी अवधि के मुनाफे के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है। भले ही मार्केट शेयर अहम है, लेकिन बैगेज को मैनेज करने और फ्लाइट शेड्यूल बनाए रखने की क्षमता सीधे कस्टमर लॉयल्टी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी से जुड़ी है। जिन एयरलाइंस को ज्यादा शिकायतें या देरी का सामना करना पड़ता है, उन्हें यात्री संख्या में गिरावट के बीच प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी ब्रांड इमेज बनाए रखने के लिए ग्राउंड ऑपरेशन को सुव्यवस्थित करना और समय पर फ्लाइट संचालन सुनिश्चित करना होगा।
