US FAA की महत्वपूर्ण समीक्षा से पहले DGCA ने प्रमुख भारतीय एयरलाइंस जैसे IndiGo और Air India का गहन सुरक्षा ऑडिट पूरा कर लिया है। अमेरिका के साथ कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए 'Category 1' स्टेटस बरकरार रखना एयरलाइंस के लिए करो या मरो जैसी स्थिति है।
ऑडिट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
DGCA ने IndiGo, Air India, Akasa Air और SpiceJet जैसी प्रमुख एयरलाइंस के सुरक्षा और इंजीनियरिंग मानकों की जांच पूरी कर ली है। यह कवायद नवंबर 2026 में होने वाली US फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) की समीक्षा से पहले की गई है। भारत के लिए 'IASA Category 1' का दर्जा बचाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही वह पास है जिसके दम पर भारतीय एयरलाइंस अमेरिकी रूट पर उड़ान भर सकती हैं और अमेरिकी कंपनियों के साथ कोडशेयर पार्टनरशिप कर सकती हैं।
सुरक्षा मानकों पर दबाव
साल 2026 की पहली छमाही में DGCA ने 352 तकनीकी खामियां पकड़ी थीं। हालिया घटनाओं, जैसे कि Air India की उड़ान में ऊंचाई कम होने जैसी घटना के बाद, रेगुलेटर अब मेंटेनेंस और पायलट ट्रेनिंग को लेकर कोई ढील नहीं बरतना चाहता। कड़े नियमों के कारण मेंटेनेंस और ट्रेनिंग पर खर्च बढ़ना तय है, जिससे एयरलाइंस के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
एयरलाइंस के लिए दोहरी चुनौती
एक तरफ सुरक्षा का दबाव है, तो दूसरी तरफ बढ़ती लागत। उदाहरण के तौर पर, मार्केट लीडर IndiGo ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹238 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है। इस घाटे के पीछे सबसे बड़ा हाथ ATF (Aviation Turbine Fuel) की कीमतों में 85.7% का जोरदार उछाल है।
निवेशकों के लिए अब सबसे बड़ी निगरानी वाली बात यह होगी कि क्या एयरलाइंस इन बढ़ते खर्चों को टिकट की कीमतों में जोड़कर यात्रियों पर डाल पाएंगी या फिर यह उनकी बैलेंस शीट को और खराब करेगा।
