डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DG Shipping) ने ब्लैक सी में भारतीय नाविकों के लिए एक सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। हाल ही में हुए घातक हमलों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। अब नियम के अनुसार, भारतीय नाविकों को तैनात करने वाले सभी जहाजों के लिए इस संघर्ष क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले, यात्रा-विशिष्ट सुरक्षा जोखिम मूल्यांकन (security risk assessment) अनिवार्य होगा।
Detailed Coverage
ब्लैक सी में क्यों बढ़ी चिंता?
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने ब्लैक सी में जहाजों और भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा जोखिमों को लेकर एक तत्काल एडवाइजरी जारी की है। यह कदम हाल ही में वाणिज्यिक जहाजों पर हुई हिंसक घटनाओं की एक श्रृंखला के बाद उठाया गया है, जिसमें दुर्भाग्य से हाल के दिनों में पांच भारतीय नाविकों की जान चली गई है। नियामक ने अब भारतीय झंडे वाले सभी जहाजों और भारतीय कर्मियों को तैनात करने वाले विदेशी झंडे वाले जहाजों के लिए इस उच्च जोखिम वाले जल क्षेत्र में प्रवेश करने या पारगमन करने से पहले व्यापक सुरक्षा जोखिम मूल्यांकन करना अनिवार्य कर दिया है।
हालिया समुद्री घटनाओं का असर
यह एडवाइजरी विशेष रूप से दो घातक हमलों के बाद आई है। 19 जुलाई 2026 को, ओडेसा, यूक्रेन से निकलते समय MV GOLDEN LEO कथित तौर पर कई मिसाइलों की चपेट में आ गया था। इस घटना में कुल 10 हताहत हुए, जिनमें 4 भारतीय नाविकों के लापता होने की आशंका थी। इसके अलावा, रूस के नोवोरोसिस्क के पास, MT Asia, MT Louise-1, और MT Nelsa नामक टैंकरों को नुकसान पहुंचा, जिससे चालक दल को खतरनाक परिस्थितियों में जहाजों को छोड़ना पड़ा। इन घटनाओं ने उन शिपिंग लाइनों के लिए महत्वपूर्ण परिचालन अनिश्चितता पैदा कर दी है जो आवश्यक व्यापार मार्गों, विशेष रूप से अनाज और ऊर्जा निर्यात के लिए इस गलियारे पर निर्भर हैं।
परिचालन और आर्थिक जोखिम
निवेशकों और लॉजिस्टिक्स फर्मों के लिए, ये घटनाक्रम परिचालन लागत में वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में संभावित व्यवधान का जोखिम पैदा करते हैं। बढ़ी हुई सुरक्षा खतरों के कारण आम तौर पर जहाज के पतवार (hull) और कार्गो कवरेज के लिए बीमा प्रीमियम, जिसे 'वॉर रिस्क प्रीमियम' (war risk premium) कहा जाता है, बढ़ जाता है। इससे क्षेत्र में काम करने वाली शिपिंग कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, जहाज को नुकसान या चालक दल की सुरक्षा संबंधी समस्याओं का जोखिम कार्गो डिलीवरी में महत्वपूर्ण देरी का कारण बन सकता है और कंपनियों को जहाजों को दूसरे रास्ते से भेजने के लिए मजबूर कर सकता है, जिससे ईंधन लागत और यात्रा का समय बढ़ जाएगा।
अनुपालन और आगे की निगरानी
समुद्री नियामक इस बात पर जोर दे रहा है कि सुरक्षा निर्देश केवल सलाह नहीं हैं, बल्कि उनके लिए सख्त अनुपालन की आवश्यकता है। शिपिंग कंपनियों से अपेक्षा की जाती है कि वे निदेशालय (Directorate) और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा निकायों से अपडेट की लगातार निगरानी करें। निवेशकों के लिए मुख्य निगरानी यह है कि क्या सुरक्षा आवश्यकताओं में वृद्धि से स्थायी लॉजिस्टिक बाधाएं उत्पन्न होती हैं, या शिपिंग फर्में पूरी तरह से इस क्षेत्र से बचने का विकल्प चुनती हैं। ब्लैक सी की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक शिपिंग बीमा लागत में किसी भी संभावित बदलाव के बारे में भविष्य के अपडेट इन व्यापार मार्गों के साथ महत्वपूर्ण एक्सपोजर वाली कंपनियों के लिए सबसे प्रासंगिक डेटा बिंदु होंगे।
