DG Shipping ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नौ-सैनिकों (Indian Seafarers) को न भेजने की सलाह दी है। यह फैसला मध्य पूर्व में बढ़ते हमलों और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए लिया गया है।
भारतीय नौ-सैनिकों की सुरक्षा को खतरा
DG Shipping (Directorate General of Shipping) ने 15 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। इसके तहत, जहाज मालिकों और भर्ती एजेंसियों को हिदायत दी गई है कि वे भारतीय चालक दल (Indian Crew) वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से न ले जाएं। यह फैसला फारस की खाड़ी में व्यापारी जहाजों पर हो रहे लगातार हमलों के बाद लिया गया है। नियामक संस्था इन हमलों को भारतीय नौ-सैनिकों की जान और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा मान रही है।
वैश्विक शिपिंग पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता है, जिससे लगभग 20% कच्चे तेल (Crude Oil) और बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का व्यापार होता है। भारत दुनिया भर में सबसे ज्यादा नौ-सैनिक उपलब्ध कराता है। ऐसे में इस रास्ते पर प्रतिबंध लगने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के लिए लॉजिस्टिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अगर जहाजों को इस इलाके से बचना पड़ता है या अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने पड़ते हैं, तो इससे सफर का समय बढ़ सकता है, बीमा प्रीमियम महंगा हो सकता है और परिचालन लागत (Operational Costs) में भी इजाफा हो सकता है।
सुरक्षा उपाय और अनुपालन
जो जहाज इस क्षेत्र से गुजरने के लिए मजबूर हैं, उनके लिए DG Shipping ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। इसमें इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी (ISPS) कोड का पालन करना शामिल है। जहाजों के मास्टरों को लगातार सतर्क रहने और क्षेत्रीय केंद्रों, जैसे मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस सेंटर (MMDAC) और इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया गया है। इन उपायों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में कम्युनिकेशन बना रहे और मदद का समन्वय तेजी से हो सके।
निवेशकों के लिए अहम जानकारी
लॉजिस्टिक्स और एनर्जी सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह सलाह भू-राजनीतिक संघर्षों (Geopolitical Conflicts) के कारण वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chains) की कमजोरी को दर्शाती है। मध्य पूर्व के रास्तों पर ज्यादा निर्भर शिपिंग कंपनियों को परिचालन लागत बढ़ने से मार्जिन पर दबाव झेलना पड़ सकता है। यह स्थिति समुद्री ऑपरेशन्स में जोखिम प्रबंधन (Risk Management) के महत्व को भी उजागर करती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि शिपिंग कंपनियां अपनी यात्रा योजनाओं में कैसे बदलाव करती हैं और क्या इन सुरक्षा चिंताओं से माल ढुलाई की दरों (Freight Rates) या ऊर्जा आपूर्ति लॉजिस्टिक्स में और अधिक उतार-चढ़ाव आता है। उद्योग के लिए अगले कदम क्रू डिप्लॉयमेंट नीतियों (Crew Deployment Policies) और बीमा कवरेज का पुनर्मूल्यांकन करना हो सकता है।
