Directorate General of Shipping ने रेड सी (Red Sea) जैसे हाई-रिस्क जोन में काम कर रहे क्रू मेंबर्स के लिए जरूरी सर्टिफिकेट्स की वैलिडिटी **3 महीने** बढ़ा दी है। इस कदम से समुद्री जहाजों के संचालन में बाधा नहीं आएगी और कंपनियों को स्टाफिंग की कमी से नहीं जूझना पड़ेगा।
राहत क्यों दी गई?
रेड सी और गल्फ ऑफ अदन में जारी तनाव के चलते दुनिया भर की शिपिंग लाइन्स को अपने जहाज 'केप ऑफ गुड होप' के लंबे रास्तों से ले जाने पड़ रहे हैं। यात्रा का समय बढ़ने के कारण, कई भारतीय सीफेयर्स तय समय पर पोर्ट्स या ट्रेनिंग सेंटर्स तक नहीं पहुंच पा रहे थे, जिससे उनके अनिवार्य सर्टिफिकेट्स के रिन्यूअल में मुश्किल हो रही थी। यदि यह राहत नहीं मिलती, तो कई कुशल क्रू मेंबर्स काम करने के योग्य नहीं रह जाते, जिससे शिपिंग कंपनियों के सामने स्टाफ का भारी संकट खड़ा हो सकता था।
सेक्टर के सामने चुनौतियां और निवेशकों के लिए संकेत
प्रशासनिक तौर पर मिली यह राहत भले ही राहत की खबर हो, लेकिन शिपिंग सेक्टर अभी भी भारी भू-राजनीतिक दबाव में है। रास्तों में बदलाव के कारण ईंधन की खपत (Fuel consumption) बढ़ गई है और मैरीटाइम इंश्योरेंस प्रीमियम में भी उछाल आया है।
निवेशकों के लिए मुख्य चिंता का विषय यह है कि बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को कैसे प्रभावित करेगी। हालांकि कंपनियों ने कामकाज जारी रखने का रास्ता ढूंढ लिया है, लेकिन ग्लोबल अस्थिरता का असर आने वाले समय में बैलेंस शीट पर दिख सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर अब इस बात पर है कि शिपिंग कंपनियां अपने बढ़ते खर्चों को कैसे मैनेज करती हैं और क्या वे बढ़ती लागत का बोझ क्लाइंट्स पर डाल पाएंगी या नहीं।
