Cochin Port Union की मांग: विलिंगडन आइलैंड का हो रीडेवलपमेंट, बढ़े पोर्ट की कमाई

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Cochin Port Union की मांग: विलिंगडन आइलैंड का हो रीडेवलपमेंट, बढ़े पोर्ट की कमाई

Cochin Port Employees Organization विलिंगडन आइलैंड पर लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक ठहराव को खत्म करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) में तुरंत सुधार की मांग कर रहा है। यूनियन ने ड्रेजिंग (Dredging) लागत पर रेवेन्यू-शेयरिंग (Revenue-Sharing) मॉडल और पोर्ट की मौजूदा सुविधाओं के बेहतर इस्तेमाल की वकालत की है ताकि ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) बढ़ाई जा सके।

Detailed Coverage

विलिंगडन आइलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता फोकस

Cochin Port Employees Organization ने विलिंगडन आइलैंड पर व्यापारिक गतिविधियों में आई कमी को लेकर चिंता जताई है। यूनियन का कहना है कि कंटेनर ट्रैफिक (Container Traffic) के वालारपादम टर्मिनल (Vallarpadam terminal) में शिफ्ट होने के बाद से यहां संचालन धीमा पड़ गया है। हाल ही में हुई द्विवार्षिक कॉन्फ्रेंस में, यूनियन ने आइलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से मजबूत करने का प्रस्ताव दिया है, जिसका मकसद कार्गो हैंडलिंग (Cargo Handling) में सुधार करना और उन रोजगार के अवसरों को बहाल करना है जो पिछले कुछ सालों में काफी कम हो गए हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर और रेवेन्यू बढ़ाने के प्रस्ताव

यूनियन की मुख्य मांगों में से एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन (Container Freight Station) का नवीनीकरण है। यूनियन का मानना ​​है कि बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करके, पोर्ट ज्यादा कार्गो वेसल्स (Cargo Vessels) को आकर्षित कर सकता है, जिससे फैसिलिटी के इस्तेमाल की दरें बढ़ेंगी। इस संबंध में पिछले डेढ़ दशक से पोर्ट मैनेजमेंट को कई प्रस्ताव दिए जा चुके हैं।

वालारपादम टर्मिनल के संबंध में, यूनियन ने ऑपरेटर (Operator) की बर्थ बेसिन ड्राफ्ट (Berth Basin Draft) बढ़ाने की मांग पर एक स्पष्ट रुख अपनाया है। यूनियन का कहना है कि किसी भी ऐसे डेवलपमेंट को एक सब-एग्रीमेंट (Sub-agreement) से जोड़ा जाना चाहिए जिससे पोर्ट के लिए अतिरिक्त रेवेन्यू सुनिश्चित हो। इसका उद्देश्य कैपिटल (Capital) और मेंटेनेंस ड्रेजिंग (Maintenance Dredging) से जुड़ी बढ़ती लागतों को कवर करना है, जो बड़े जहाजों के लिए शिपिंग चैनलों को खुला रखने के लिए जरूरी हैं। यूनियन ने यह भी सुझाव दिया है कि केंद्र सरकार को इन वार्षिक ड्रेजिंग खर्चों का एक बड़ा हिस्सा वहन करने या नेविगेशन चैनल (Navigation Channel) के सभी उपयोगकर्ताओं के बीच लागत को अधिक समान रूप से वितरित करने पर विचार करना चाहिए।

सहयोग और ऑपरेशनल एफिशिएंसी

यूनियन क्षेत्रीय पोर्ट प्रतिस्पर्धा (Regional Port Competition) और सहयोग के लिए एक स्ट्रेटेजिक अप्रोच (Strategic Approach) पर भी जोर दे रही है। इसके लिए विझिंजम पोर्ट (Vizhinjam Port) और वालारपादम टर्मिनल के बीच संचालन में तालमेल बिठाने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी (Expert Committee) बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। सीधा मुकाबला करने के बजाय सहयोग को बढ़ावा देकर, यूनियन का लक्ष्य एक ऐसी सिनर्जी (Synergy) बनाना है जो कुल व्यापार मात्रा को लाभ पहुंचाए। इसके अलावा, पोर्ट के कुल रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए पुथुवायप (Puthuvype) और वालारपादम में मौजूदा जमीन और चल रही परियोजनाओं के उपयोग को अनुकूलित करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा, यूनियन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति (Retirements) के कारण खाली हुई सीटों जैसे आंतरिक परिचालन मुद्दों को भी संबोधित कर रही है। संगठन ने कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स (Contract Workers) के रोजगार की शर्तों की समीक्षा करने की भी मांग की है, जिसमें स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन और लाभ की मांग की गई है।

भारत में लॉजिस्टिक्स (Logistics) और पोर्ट सेक्टर (Port Sector) पर नजर रखने वाले निवेशकों और हितधारकों को पोर्ट मैनेजमेंट (Port Management) और संबंधित सरकारी अधिकारी इन इंफ्रास्ट्रक्चर और रेवेन्यू-शेयरिंग की मांगों पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर अपडेट का इंतजार रहेगा। भविष्य के ड्रेजिंग समझौतों का वित्तीय प्रभाव और टर्मिनल के उपयोग में वृद्धि की संभावना पोर्ट के दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बने रहेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.