Cochin International Airport Limited (CIAL) ने अपनी ऑपरेशनल एक्सपर्टीज को भुनाने के लिए एक नई कंसल्टेंसी डिवीजन 'CIAL ACES' की शुरुआत की है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में **₹502 करोड़** के मुनाफे के बाद, कंपनी अब सर्विस-लेड ग्रोथ पर दांव लगा रही है।
बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव
एयरपोर्ट ऑपरेशन एक कैपिटल-इंटेंसिव काम है, जिसमें रनवे और टर्मिनल में भारी निवेश की जरूरत होती है। हालांकि, CIAL ACES के जरिए कंपनी अब 'एसेट-लाइट' मॉडल अपना रही है। इस नए डिवीजन का मकसद अपनी तकनीकी जानकारी और अनुभव को अन्य एयरपोर्ट्स को बेचकर रेवेन्यू जुटाना है। इसमें एयरपोर्ट मास्टर प्लानिंग, रनवे डेवलपमेंट और कार्गो मैनेजमेंट जैसी सर्विसेज शामिल हैं। कंपनी ने इसकी शुरुआत पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर एयरपोर्ट से की है, जहां वे पैसेंजर वेरिफिकेशन सिस्टम लागू कर रहे हैं।
शानदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
कंपनी के हालिया नतीजों पर नजर डालें तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कुल रेवेन्यू ₹1,220 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट ₹502 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी की मजबूत कैश पोजिशन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बोर्ड ने 55% डिविडेंड देने का फैसला किया है। इस दौरान एयरपोर्ट ने 1.14 करोड़ यात्रियों और 73,134 एयरक्राफ्ट मूवमेंट्स को हैंडल किया है।
सस्टेनेबिलिटी पर फोकस
कंसल्टेंसी के अलावा, CIAL ने एयरलाइंस के लिए 'ब्रिज माउंटेड इक्विपमेंट' (BME) की सुविधा शुरू की है। इससे विमानों को रनवे पर रुकने के दौरान सीधे बिजली मिल सकेगी, जिससे वे अपने इंजन बंद रख पाएंगे। कंपनी इसे फ्री में उपलब्ध करा रही है, जिसका उद्देश्य कार्बन फुटप्रिंट कम करना और एयरलाइंस की ऑपरेशनल कॉस्ट घटाना है।
आगे की राह
निवेशकों के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी कितनी तेजी से इस मॉडल को अन्य प्रोजेक्ट्स तक ले जाती है। भविष्य में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब और ग्लोबल कन्वेंशन सेंटर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी।
