China Southern Airlines ने 21 सितंबर, 2026 से दिल्ली-ग्वांगझू के बीच सीधी उड़ानें दोबारा शुरू करने का ऐलान किया है। BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान यह कदम रिश्तों में सुधार का संकेत है, लेकिन कंपनी के बढ़ते घाटे और जियो-पॉलिटिकल रिस्क पर निवेशकों की नजर है।
फिर से शुरू होगा सफर
चीन और भारत के बीच हवाई संपर्क में एक बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। China Southern Airlines ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि 21 सितंबर, 2026 से दिल्ली और ग्वांगझू के बीच सीधी पैसेंजर फ्लाइट्स फिर से शुरू हो जाएंगी। शुरुआत में हफ्ते में 5 उड़ानें भरी जाएंगी, जिसे 26 अक्टूबर, 2026 से बढ़ाकर रोजाना (Daily) कर दिया जाएगा। यह विकास ऐसे समय में हुआ है जब दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन हो रहा है, जो आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश है।
फाइनेंशियल सेहत और चुनौती
ऑपरेशनल मोर्चे पर कंपनी एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। 2026 की पहली छमाही में एयरलाइन को करीब RMB 3.7 बिलियन का नेट लॉस हुआ है। अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने और बेड़े के विस्तार के लिए कंपनी ने RMB 15 बिलियन तक की राशि प्राइवेट शेयर प्लेसमेंट के जरिए जुटाने की मंजूरी भी ली है। मार्केट एक्सपर्ट्स इसे कंपनी के लिक्विडिटी मैनेजमेंट को सुधारने की कवायद मान रहे हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
एविएशन सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को यह समझना होगा कि इस रूट की सफलता दो मुख्य कारकों पर टिकी है:
- फ्यूल की कीमतें: एशिया भर की एयरलाइंस के प्रॉफिट मार्जिन पर लगातार बढ़ रहे कच्चे तेल के दाम (Crude Oil Prices) भारी दबाव डाल रहे हैं।
- डिप्लोमैटिक स्थिरता: भारत और चीन के बीच के रिश्ते इस रूट की निरंतरता को तय करेंगे। जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता के कारण फ्लाइट्स शेड्यूल में अचानक बदलाव का रिस्क हमेशा बना रहता है।
अंत में, यह एयरलाइन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन मुनाफा बढ़ाने के लिए पैसेंजर डिमांड और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
