Chennai International Airport पर एयर कार्गो की भारी भीड़ और देरी ने एक्सपोर्टर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सामान को एयरपोर्ट से निकलने में **5 दिन** तक का समय लग रहा है, जिसके चलते इलेक्ट्रॉनिक और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां अपना शिपमेंट बेंगलुरु डायवर्ट कर रही हैं।
चेन्नई एयरपोर्ट पर एयर कार्गो टर्मिनल्स इस समय भारी दबाव में हैं, जिससे एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिकल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कार्गो प्रोसेसिंग में 5 दिन तक की देरी हो रही है, जिससे उन कंपनियों की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है, जिन्हें अपना सामान जल्दी विदेश भेजना होता है। इस संकट से बचने के लिए कई कंपनियां अब अपने माल को ट्रकों के जरिए बेंगलुरु के Kempegowda International Airport भेज रही हैं, ताकि समय पर डिलीवरी सुनिश्चित की जा सके।
उद्योगों पर गहरा असर
ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेरिशेबल गुड्स (जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं) से जुड़ी कंपनियों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है। इन क्षेत्रों में समय की पाबंदी बहुत जरूरी है, और देरी होने पर ऑर्डर कैंसल होने या प्रोडक्शन रुकने का खतरा बना रहता है। अगर ये कमियां बनी रहती हैं, तो चेन्नई के एक बड़े लॉजिस्टिक्स हब के रूप में साख पर भी खतरा मंडरा सकता है।
क्यों मचा है यह घमासान?
इस संकट की मुख्य वजह एयर-फ्रेट वॉल्यूम में अचानक हुई बढ़ोतरी है। समुद्री रास्तों पर भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कई शिपर्स अब सी-रूट की जगह एयर-रूट चुन रहे हैं। चेन्नई का पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर इस बढ़े हुए दबाव को झेलने में सक्षम नहीं है। इसके अलावा, मैनपावर की कमी और ट्रकों के आने-जाने पर म्युनिसिपल पाबंदियों ने स्थिति और गंभीर बना दी है।
क्या है समाधान और भविष्य की राह?
ट्रेड बॉडीज ने सुधार के लिए सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी पर दबाव बढ़ा दिया है। एक मुख्य प्रस्ताव 'डिजिटल टोकन सिस्टम' लागू करने का है, जिससे केवल तय समय (उड़ान से 24 से 36 घंटे पहले) के भीतर ही ट्रकों को एंट्री मिले। साथ ही, कार्गो ऑपरेशंस को 24/7 चलाने की मांग हो रही है ताकि कस्टम विभाग की तर्ज पर काम तेजी से हो सके। निवेशकों के लिए अब यह देखना जरूरी होगा कि अथॉरिटी कितनी जल्दी इन डिजिटल सुधारों को जमीन पर उतार पाती है।
