महाराष्ट्र में सूखे से जूझ रहे इलाकों के लिए Central Railway ने वाटर ट्रेन चलाने की पूरी तैयारी कर ली है। हालांकि, सेवा शुरू करने के लिए रेलवे को राज्य सरकार से औपचारिक आग्रह और पानी के स्रोतों की जानकारी का इंतजार है।
तैयारी पूरी, पर आदेश का इंतजार
Central Railway ने स्पष्ट कर दिया है कि वे महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी पहुंचाने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने को तैयार हैं। लेकिन फिलहाल, यह सेवा शुरू नहीं हो सकी है क्योंकि रेलवे को अभी तक राज्य सरकार की ओर से कोई फॉर्मल रिक्वेस्ट नहीं मिली है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि उनकी जिम्मेदारी केवल पानी के परिवहन (Logistics) की है, इसलिए राज्य सरकार को पहले पानी के विश्वसनीय स्रोतों की पहचान करनी होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती और स्थानीय व्यवस्था
ट्रेनों के परिचालन में सबसे बड़ी बाधा लोडिंग और अनलोडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। रेलवे का साफ कहना है कि पानी का इंतजाम करना उनकी जिम्मेदारी में नहीं आता। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को सुनिश्चित करना होगा कि पानी के स्रोत पर पर्याप्त पानी उपलब्ध हो और गंतव्य पर पानी स्टोर करने की सुविधा मौजूद हो। फिलहाल, Central Railway बीड, सोलापुर और कोल्हापुर जैसे जिलों में अपने स्टेशनों के संचालन को बनाए रखने पर ध्यान दे रही है ताकि रेल सेवाओं पर कोई असर न पड़े।
2016 के मुकाबले इस बार ज्यादा जटिल है स्थिति
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान सूखा संकट 2016 के लातूर जल संकट से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है। उस समय 'जलदूत' ट्रेनों के जरिए केवल एक स्थान से पानी लातूर तक पहुंचाया जा रहा था, जो एक सरल लॉजिस्टिक था।
इस बार स्थिति बिखरी हुई है। राज्य के 358 में से 265 तालुकों में पानी की भारी किल्लत है। यह समस्या सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना तक फैल गई है। इतने बड़े स्तर पर अलग-अलग लोडिंग पॉइंट और गंतव्यों के बीच तालमेल बिठाना बेहद कठिन काम है। 8 अक्टूबर तक मानसून की विदाई के बाद बारिश की उम्मीदें भी कम हैं, ऐसे में अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और रेलवे के बीच होने वाले तालमेल पर टिकी हैं।
