Varanasi Highway & Rail Projects: कैबिनेट का बड़ा ऐलान! ₹24,000 करोड़ से संवरेगा इंफ्रा, जानें किसे होगा फायदा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Varanasi Highway & Rail Projects: कैबिनेट का बड़ा ऐलान! ₹24,000 करोड़ से संवरेगा इंफ्रा, जानें किसे होगा फायदा

केंद्र सरकार ने वाराणसी में हाईवे और ओडिशा में रेल परियोजनाओं के लिए **₹24,000 करोड़** से ज़्यादा के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दे दी है। इन पहलों का मकसद वाराणसी में ट्रैफिक जाम को कम करना और पूर्वी क्षेत्र में सालाना **4.4 करोड़ टन** माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाना है।

वाराणसी के लिए ₹25,446 करोड़ की हाईवे सौगात

कैबिनेट ने सबसे पहले वाराणसी में दो प्रमुख हाईवे कॉरिडॉर के लिए लगभग ₹25,446 करोड़ के भारी-भरकम निवेश को मंज़ूरी दी है। ये प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (Hybrid Annuity Model) पर बनाए जाएंगे। इस मॉडल में, सरकार निर्माण के दौरान प्रोजेक्ट लागत का 40% भुगतान करती है, जबकि बाकी का फाइनेंसिंग और मेंटेनेंस एक प्राइवेट डेवलपर संभालता है।

  • पहला प्रोजेक्ट: यह नेशनल हाईवे-19 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा, जिस पर ₹14,447.64 करोड़ खर्च होंगे। इससे यात्रा का समय 60 मिनट से घटकर 20 मिनट हो जाने की उम्मीद है।
  • दूसरा प्रोजेक्ट: यह NH-31 को वाराणसी रिंग रोड से कनेक्ट करेगा, जिसमें ₹10,998.32 करोड़ का निवेश होगा। इसका लक्ष्य NH-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा के समय को आधा करना है।

ये प्रोजेक्ट शहर की पुरानी ट्रैफिक समस्याओं का समाधान करेंगे और स्थानीय पर्यटन व रियल एस्टेट को बढ़ावा दे सकते हैं।

ओडिशा में रेल नेटवर्क का विस्तार: ₹3,907 करोड़ का खास प्लान

सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा, कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने रेलवे प्रोजेक्ट्स के लिए ₹3,907 करोड़ की मंज़ूरी भी दी है। इसमें पारादीप-हरिदासपुर लाइन का डबलिंग और राजखरसवां-डांगोपोसी के बीच चौथी लाइन बिछाना शामिल है।

  • इस अपग्रेड से रेलवे नेटवर्क में 145 किलोमीटर का इजाफा होगा।
  • यह माल ढुलाई के रास्ते की बाधाओं को दूर करेगा और क्षमता को सालाना 4.4 करोड़ टन बढ़ाएगा।

इससे ओडिशा के औद्योगिक हब से निकलने वाले मिनरल्स और पोर्ट-तक पहुंचने वाले माल की आवाजाही आसान होगी।

PM गति शक्ति प्लान और आगे का रास्ता

ये सभी प्रोजेक्ट्स PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत आते हैं, जिसका लक्ष्य भारत में लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करना है। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इन प्रोजेक्ट्स का पूरा फायदा समय पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल वाले प्रोजेक्ट्स में ज़मीन अधिग्रहण में देरी या स्टील और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री की कीमतों में उतार-चढ़ाव से लागत बढ़ने का जोखिम रहता है।

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