केंद्र सरकार ने देश में ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए 'Integrated Transport & Logistics Authority' (ITLA) के गठन को हरी झंडी दे दी है।
भारत सरकार ने मल्टी-मोडल इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग को नई दिशा देने के लिए Integrated Transport & Logistics Authority (ITLA) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। अब तक अलग-अलग मंत्रालय अपने स्तर पर काम कर रहे थे, लेकिन यह नई बॉडी इन सबको एक साथ लाकर कनेक्टिविटी के अंतर को पाटने का काम करेगी।
कैसे काम करेगी यह नई बॉडी?
ITLA एक 'स्पेशल पर्पस व्हीकल' (SPV) के रूप में काम करेगी। इसका मुख्य काम सड़क, रेल, पोर्ट्स, शिपिंग और एविएशन सेक्टर के लिए रिसर्च और मॉनिटरिंग करना होगा। सरकार का लक्ष्य इसके जरिए 10 साल का एक 'नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान' तैयार करना है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट नेशनल गोल्स के साथ अलाइन हो सके।
बड़े प्रोजेक्ट्स पर होगा कड़ा पहरा
अब ₹500 करोड़ या उससे ज्यादा की लागत वाले सभी सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए ITLA से तकनीकी मूल्यांकन (Technical Appraisal) कराना अनिवार्य होगा। हालांकि यह मौजूदा फाइनेंशियल क्लीयरेंस को रिप्लेस नहीं करेगा, लेकिन यह प्रोजेक्ट्स की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को सुनिश्चित करेगा।
डेटा के जरिए बदलेगी तस्वीर
ITLA एक 'नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी' बनाएगी, जिसमें GSTN ई-वे बिल, FASTag ट्रांजैक्शन और Vahan रजिस्ट्रेशन का डेटा लिया जाएगा। इस डेटा के विश्लेषण से फ्रेट मूवमेंट और सप्लाई चेन की कमियों को दूर करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह कदम इंफ्रा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए काफी अहम है। हालांकि, लॉन्ग टर्म में यह प्रोजेक्ट्स को रफ्तार दे सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में एक अतिरिक्त अप्रूवल लेयर आने से प्रशासनिक देरी की चुनौती भी हो सकती है। फिलहाल इंडस्ट्री और इन्वेस्टर्स इस बात पर नजर रखेंगे कि ITLA किस तरह मंत्रालयों के बीच तालमेल बिठाकर 'Vision 2047' के लक्ष्यों को हासिल करती है।
