CIAL (Cochin International Airport Ltd) ने ग्राउंड ऑपरेशंस में एक बड़ा बदलाव लाते हुए भारत का पहला एयरपोर्ट बनने का गौरव हासिल किया है, जो पैसेंजर ट्रांसपोर्ट के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक बसों को पेश कर रहा है। यह फैसला केरल हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर (K-HVIC) फाउंडेशन के साथ हुए एक मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MoA) के बाद आया है। इस समझौते के तहत, तीन ऐसी बसों की खरीद और संचालन किया जाएगा। यह पहल राज्य की केरल हाइड्रोजन वैली परियोजना और केंद्र सरकार के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, दोनों का एक अहम हिस्सा है।
K-HVIC फाउंडेशन वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, जिसमें प्रति बस ₹2.90 करोड़ तक का सपोर्ट शामिल है। पूरे प्रोजेक्ट का कुल खर्च ₹8.7 करोड़ से ज्यादा नहीं होगा, जिसे किश्तों में जारी किया जाएगा। बसों का मालिकाना हक और संचालन नियंत्रण CIAL के पास रहेगा, जो सेवा रूट और मॉडल भी तय करेगा। बसों की खरीद प्रक्रिया 12 महीने के भीतर पूरी होने की उम्मीद है। इस रणनीतिक कदम से यात्रियों की सुविधा बढ़ने और एयरपोर्ट ट्रांसपोर्टेशन सेवाओं के कार्बन फुटप्रिंट में काफी कमी आने की उम्मीद है।
CIAL का यह कदम इसे भारतीय विमानन क्षेत्र के ग्रीन ट्रांज़िशन में एक अग्रणी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है। जहां अन्य भारतीय हवाई अड्डे लगातार रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को इंटीग्रेट कर रहे हैं, वहीं CIAL की हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी को पैसेंजर ट्रांसपोर्ट में अपनाना एक अनूठी पहल है। यह CIAL को अलग पहचान देता है और पर्यावरण के प्रति जागरूक यात्रियों को आकर्षित कर सकता है। ऐतिहासिक रूप से, CIAL के शेयर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की घोषणाओं पर 2-5% की सीमा में मामूली सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाते रहे हैं, जो बताता है कि बड़े पैमाने पर ऑपरेशनल सफलता या स्केलेबिलिटी पर मार्केट का मूल्यांकन बढ़ सकता है।
2 फरवरी 2026 को, CIAL का शेयर ₹150.25 प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहा था, जिसमें लगभग 1.5 मिलियन शेयरों का कारोबार हुआ। यह निवेशकों की कंपनी के भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में रुचि को दर्शाता है। CIAL का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹25,000 करोड़ है, और इसका P/E रेश्यो 35.5 है। यह दर्शाता है कि मार्केट भविष्य की ग्रोथ को देखते हुए, खासकर इस तरह के रणनीतिक प्रोजेक्ट्स से, कंपनी का मूल्यांकन कर रहा है।
केरल हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर फाउंडेशन ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने और राज्य व राष्ट्रीय ऊर्जा ट्रांज़िशन लक्ष्यों के तहत इस तरह की पायलट परियोजनाओं का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन इस तरह के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स के लिए एक सहायक पॉलिसी फ्रेमवर्क और को-फंडिंग के रास्ते खोलता है, जिससे CIAL जैसी संस्थाओं के लिए जोखिम कम होता है।
हाइड्रोजन बसों के लिए फ्यूल सप्लाई, CIAL और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के एक ज्वाइंट वेंचर ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट से सुनिश्चित की जाएगी, जिसके जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। आवश्यक हाइड्रोजन सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए वैधानिक मंजूरी मिल चुकी है, जिससे तेजी से रोलआउट संभव होगा। CIAL का ऑपरेशनल कंट्रोल इसे इन बसों को मौजूदा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में रणनीतिक रूप से एकीकृत करने, पैसेंजर फ्लो और सर्विस डिलीवरी को ऑप्टिमाइज़ करने की अनुमति देता है। शुरुआती तैनाती की सफलता, हाइड्रोजन फ्लीट का विस्तार करने या एयरपोर्ट ऑपरेशंस के लिए अन्य ग्रीन फ्यूल विकल्पों की खोज के द्वार खोल सकती है। CIAL के रेगुलेटरी फाइलिंग्स लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस दिखाते हैं।