CCI का बड़ा कदम: IndiGo पर शुरू हुई जांच
CCI के 16 पेज के विस्तृत आदेश में कहा गया है कि IndiGo ने अपनी शेड्यूल क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रद्द करके, प्रभावी रूप से सेवाएं रोकीं। नियामक (regulator) का मानना है कि इस कदम से एयर ट्रैवल मार्केट में जानबूझकर कमी पैदा की गई और जब मांग सबसे ज्यादा थी, तब यात्रियों के लिए विकल्प बहुत सीमित कर दिए गए। CCI ने साफ किया है कि एक प्रमुख कंपनी (dominant enterprise) द्वारा इस तरह का आचरण Competition Act की धारा 4(2)(b)(i) के तहत सेवाओं के प्रावधान को प्रतिबंधित करने के दायरे में आ सकता है, जो डोमिनेंट पोजीशन के दुरुपयोग पर रोक लगाता है।
ऑपरेशनल दिक्कतों के बीच शुरू हुई जांच
यह जांच IndiGo की हालिया ऑपरेशनल चुनौतियों के बीच सामने आई है। दिसंबर की शुरुआत में, एयरलाइन को बड़े पैमाने पर व्यवधानों का सामना करना पड़ा था, जिसके चलते Directorate General of Civil Aviation (DGCA) ने उसकी विंटर शेड्यूल को 10% तक घटाकर 10 फरवरी तक लागू करने का आदेश दिया था।
आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ 3 दिसंबर से 5 दिसंबर के बीच, IndiGo ने 2,507 फ्लाइट्स रद्द कीं और 1,852 फ्लाइट्स में देरी हुई। इस अव्यवस्था का खामियाजा देश भर में 3 लाख से अधिक यात्रियों को भुगतना पड़ा। अब CCI के Director General इस पूरे मामले की गहराई से जांच करेंगे।
मार्केट पर दबदबे (Market Dominance) को लेकर चिंता
प्रतिस्पर्धा आयोग (competition watchdog) को शुरुआती जांच में ही ऐसे संकेत मिले हैं कि IndiGo के इस कदम से भारत में प्रतिस्पर्धा (competition) पर गहरा नकारात्मक असर पड़ सकता है। Competition Act की धारा 4 किसी भी कंपनी को अपनी डोमिनेंट पोजीशन (dominant position) का दुरुपयोग करने से रोकती है। CCI का मानना है कि IndiGo ने शायद मार्केट सप्लाई (market supply) को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की है, जो एक गंभीर आरोप है, खासकर तब जब IndiGo घरेलू एयर पैसेंजर मार्केट में सबसे बड़ी प्लेयर है।
