कुरियर कंसाइनमेंट की वैल्यू लिमिट हटी
1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो रहे इन ट्रेड रिफॉर्म्स का मकसद भारतीय ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट्स को ज़बरदस्त बूस्ट देना है। सबसे खास बात यह है कि अब कुरियर से भेजे जाने वाले सामान पर ₹10 लाख की वैल्यू लिमिट नहीं रहेगी। यह फैसला छोटे और मध्यम आकार के बिज़नेस (MSMEs), स्टार्टअप्स और कारीगरों के लिए बेहद फायदेमंद होगा, क्योंकि वे अब ज़्यादा कीमत वाले प्रोडक्ट्स को आसानी से दुनिया भर में भेज पाएंगे। इससे उन्हें जटिल एयर या सी कार्गो की व्यवस्था से छुटकारा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स भी आसान हो जाएगी।
रिटर्न और री-इम्पोर्ट की प्रक्रिया हुई सरल
इसके अलावा, इम्पोर्ट किए गए सामान की 'रिटर्न टू ओरिजिन' (RTO) प्रक्रिया को भी काफी सरल बनाया गया है। जो सामान 15 दिनों से ज़्यादा समय से कुरियर टर्मिनल पर अटके हैं, उन्हें अब जल्दी से उनके मूल देश वापस भेजा जा सकेगा। इससे टर्मिनलों पर जमावड़ा कम होगा और लॉजिस्टिक्स की एफिशिएंसी बढ़ेगी। विदेशी खरीदारों द्वारा लौटाए गए या रिजेक्ट हुए शिपमेंट्स को फिर से इम्पोर्ट करने की प्रक्रिया को भी आसान किया गया है, जिससे एक्सपोर्टर्स को बड़ी राहत मिलेगी।
रिस्क-बेस्ड वेरिफिकेशन का होगा इस्तेमाल
अब हर कंसाइनमेंट की जांच के बजाय, CBIC 'रिस्क-बेस्ड' चेकिंग सिस्टम लागू करेगा। यानी, केवल उन शिपमेंट्स पर ही इंस्पेक्शन केंद्रित होगा, जिन्हें रिस्क पैरामीटर्स के आधार पर पहचाना जाएगा। इससे ज़्यादातर वैध सामानों की क्लीयरेंस तेज़ी से हो सकेगी। 'एक्सप्रेस कार्गो क्लीयरेंस सिस्टम' (Express Cargo Clearance System) के भीतर एक डेडिकेटेड मॉड्यूल भी बनाया गया है, जो लौटे हुए और रिजेक्ट हुए शिपमेंट्स को ज़्यादा प्रभावी ढंग से मैनेज करेगा।
एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस को मिलेगी बढ़त
ये सभी सुधार सरकार की ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट्स को बढ़ाने और 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' रैंकिंग में भारत की स्थिति को बेहतर बनाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं। प्रक्रिया की रुकावटों को दूर करके और कंप्लायंस को सरल बनाकर, नए नियमों से बिज़नेस में लगने वाला समय कम होने, लागत घटने और भारतीय एक्सपोर्टर्स की वैश्विक बाज़ार में कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ने की उम्मीद है।