बेंगलुरु मेट्रो (BMRCL) की धीमी रफ्तार: CAG रिपोर्ट में खुलासा, यात्रियों की संख्या और कमाई के लक्ष्य चूके

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
बेंगलुरु मेट्रो (BMRCL) की धीमी रफ्तार: CAG रिपोर्ट में खुलासा, यात्रियों की संख्या और कमाई के लक्ष्य चूके

बेंगलुरु मेट्रो (BMRCL) को लेकर एक बड़ी ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बताया गया है कि BMRCL साल 2007 में तय किए गए यात्रियों की संख्या के लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रही है। रिपोर्ट में खराब सर्विस इंटीग्रेशन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की कमी को मुख्य वजह बताया गया है।

कनेक्टिविटी और इंटीग्रेशन में बड़ी चूक?

CAG की परफॉर्मेंस ऑडिट में यह बात सामने आई है कि बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) यात्रियों की संख्या और पीक ऑवर ट्रैफिक के अपने लक्ष्यों से लगातार पिछड़ती रही है। रिपोर्ट, जिसे संसद में पेश किया गया, बताती है कि मेट्रो प्रोजेक्ट उम्मीद के मुताबिक यात्रियों को आकर्षित करने में संघर्ष कर रहा है।

ऑडिट में एक बड़ी चिंता यह भी बताई गई है कि मेट्रो और बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (BMTC) की बस सेवाओं के बीच तालमेल की कमी है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों सिस्टम को मिलाकर जितने यात्री सफर करते हैं, वह मेट्रो शुरू होने से पहले अकेले बस नेटवर्क से सफर करने वाले यात्रियों से भी कम है। इससे पता चलता है कि मेट्रो, प्राइवेट व्हीकल इस्तेमाल करने वालों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर मोड़ने में सफल नहीं हो पाई है। CAG ने स्टेशन पर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की कमी और पार्किंग की अपर्याप्त व्यवस्था को भी यात्रियों के लिए एक बड़ी बाधा बताया है।

वित्तीय स्थिति और ऑपरेशनल हेल्थ

यह जानना अहम है कि BMRCL एक पब्लिक सेक्टर कंपनी है जिसके शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होते। वित्तीय तौर पर, यह कंपनी एक मुश्किल स्थिति में है। हालांकि BMRCL अक्सर ऑपरेशनल सरप्लस (यानी दैनिक संचालन से होने वाली कमाई, खर्च से ज्यादा होती है) जनरेट करती है, लेकिन नेट लॉस में चल रही है। यह नुकसान मुख्य रूप से भारी ब्याज भुगतान और एसेट डेप्रिसिएशन की नॉन-कैश कॉस्ट के कारण है।

इसके अलावा, BMRCL पर विदेशी मुद्रा में काफी बड़ा कर्ज़ है। कंपनी ने जून 2026 तक एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से लिए गए $500 मिलियन के लोन की रीपेमेंट शुरू कर दी है। भारतीय रुपये के मुकाबले अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से कंपनी पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें मूल योजना से ज़्यादा स्थानीय करेंसी में भुगतान करना पड़ रहा है। टिकट बिक्री के अलावा प्रॉपर्टी डेवलपमेंट और लीजिंग जैसी अन्य आय के स्रोतों से होने वाली कमाई भी उम्मीद से काफी कम रही है।

आगे की राह

भारत सरकार और कर्नाटक सरकार के ज्वाइंट वेंचर BMRCL अपने नेटवर्क का विस्तार करने का काम जारी रखे हुए है। फेज 1 पूरी तरह से चालू है, जबकि फेज 2 के कुछ हिस्से अभी भी कंस्ट्रक्शन के अधीन हैं और इनके 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। मौजूदा ऑपरेशनल और वित्तीय चुनौतियों को देखते हुए, कंपनी के लिए यात्रियों की संख्या बढ़ाना, स्टेशन तक आसान पहुंच बनाना, बचे हुए कॉरिडोर का काम समय पर पूरा करना और अपने कर्ज का प्रबंधन करना मुख्य प्राथमिकताएं होंगी। हाल ही में सरकारी निकायों द्वारा सर्विस रिलायबिलिटी को लेकर की गई सेफ्टी ऑडिट जैसी जांचें भी मैनेजमेंट के लिए फोकस का क्षेत्र बनी हुई हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.