कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी ग्लोबल पहचान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में भारत को ग्लोबल कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने अगले पांच सालों के लिए ₹10,000 करोड़ का एक विशेष फंड जारी करने का प्रस्ताव रखा है। इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य देश के अंदर ही वर्ल्ड-क्लास कंटेनर बनाने की क्षमता विकसित करना है, ताकि भारत वैश्विक व्यापार में और ज़्यादा कॉम्पिटिटिव बन सके।
लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा विस्तार
बजट में देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मज़बूत करने के लिए कई अहम घोषणाएं की गई हैं। पूर्वी भारत के डांकुनी (Dankuni) से लेकर पश्चिम में सूरत तक एक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor) बनाया जाएगा। इससे मालगाड़ियों की आवाजाही तेज़ होगी और सामान एक जगह से दूसरी जगह जल्दी पहुँच सकेगा।
20 नए नेशनल वॉटरवेज़ होंगे चालू
इसके साथ ही, अगले पांच सालों में 20 नए नेशनल वॉटरवेज़ (National Waterways) को ऑपरेशनल करने की योजना है। इसमें सबसे पहले ओडिशा में NW-5 को शुरू किया जाएगा, जो प्रमुख औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों को बड़े पोर्ट्स से जोड़ेगा।
जलमार्गों और कोस्टल शिपिंग को मिलेगा बढ़ावा
पर्यावरण के अनुकूल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए 'कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम' (Coastal Cargo Promotion Scheme) भी लाई गई है। इसका लक्ष्य 2047 तक इनलैंड वॉटरवेज़ और कोस्टल शिपिंग के ज़रिए होने वाली माल ढुलाई के हिस्सेदारी को मौजूदा 6% से बढ़ाकर 12% करना है। वाराणसी और पटना में इनलैंड वॉटरवेज़ के लिए एक शिप-रिपेयर इकोसिस्टम भी स्थापित किया जाएगा।
सी-प्लेन के डोमेस्टिक प्रोडक्शन को भी मिलेगा बूस्ट
टूरिज्म और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए, सरकार 'सी-प्लेन वीजीएफ स्कीम' (Seaplane VGF Scheme) के ज़रिए सी-प्लेन के डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को भी प्रोत्साहित करेगी। वॉटरवेज़ सेक्टर के लिए मैनपावर तैयार करने हेतु रीजनल सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस भी खोले जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे।