British Airways अपने **12** Airbus A380 विमानों की सेटिंग में बड़ा बदलाव कर रही है। प्रीमियम यात्रियों को लुभाने के लिए कंपनी कुल सीटिंग क्षमता में **11%** की कटौती कर रही है, ताकि London Heathrow पर सीमित स्लॉट्स के बीच प्रति फ्लाइट ज्यादा कमाई की जा सके।
British Airways ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अपने 12 Airbus A380 विमानों का कायाकल्प करने का फैसला किया है। कंपनी का लक्ष्य अब पैसेंजर वॉल्यूम के बजाय हाई-पेइंग ग्राहकों को प्राथमिकता देना है। इस रिफर्बिशमेंट प्रोग्राम के तहत, हर A380 की कुल सीटिंग क्षमता 469 से घटकर 417 रह जाएगी। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर इकोनॉमी क्लास पर पड़ा है, जहां सीटों की संख्या 303 से कम होकर 215 हो गई है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस कदम के पीछे मुख्य वजह London Heathrow पर फ्लाइट्स के लिए जगह की कमी है। चूंकि वहां टेक-ऑफ और लैंडिंग के स्लॉट्स सीमित हैं, कंपनी फ्लाइट्स की संख्या नहीं बढ़ा सकती। ऐसे में, मौजूदा विमानों में ही बिजनेस क्लास की सीटें बढ़ाकर कंपनी अपनी प्रति फ्लाइट कमाई (Revenue) को बढ़ाना चाहती है। अब A380 का पूरा ऊपरी डेक 106 सीटों वाली बिजनेस क्लास के लिए समर्पित होगा।
क्या हैं बिजनेस जोखिम?
यह बदलाव कंपनी के लिए आसान नहीं है। एक विमान के केबिन अपग्रेड में 35,000 से ज्यादा पार्ट्स बदले जा रहे हैं, जो काफी महंगा सौदा है। अगर सप्लाई चेन में देरी होती है, तो कंपनी की योजना पटरी से उतर सकती है। साथ ही, अब कंपनी का प्रॉफिट बिजनेस ट्रैवल मार्केट के उतार-चढ़ाव पर ज्यादा निर्भर हो गया है। अगर इकोनॉमी कमजोर होती है और प्रीमियम डिमांड घटती है, तो कम सीटों के कारण कंपनी के पास वॉल्यूम मेंटेन करने का विकल्प कम रहेगा।
आगे की राह
इस बदलाव के चलते कंपनी ने विंटर 2026 सीजन के लिए अपनी फ्लाइट शेड्यूल में लगभग 28% की कटौती की है। पैरेंट कंपनी, International Airlines Group के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रीमियम यात्रियों से मिलने वाला बढ़ा हुआ रेवेन्यू इस रिफिट की लागत को कवर कर पाएगा। बाजार की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि रिफर्बिशमेंट के बाद विमानों की सर्विसिंग कितनी स्मूथ रहती है और क्या प्रीमियम डिमांड इस बड़े दांव को सही साबित कर पाती है।
