आंध्र प्रदेश का Bhogapuram इंटरनेशनल एयरपोर्ट तीन साल के तेज निर्माण के बाद लगभग तैयार है, जबकि तमिलनाडु का Parandur एयरपोर्ट प्रोजेक्ट बड़ी देरी का सामना कर रहा है। उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण को लेकर स्थानीय विरोध ने चेन्नई स्थित प्रोजेक्ट को रोक दिया है, जिससे क्षेत्र की विमानन प्रतिस्पर्धात्मकता पर सवाल उठ रहे हैं।
Detailed Coverage
दक्षिण भारत में एविएशन इंफ्रा का अलग-अलग मंज़र
दक्षिण भारत में एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में दो बिलकुल अलग तस्वीर देखने को मिल रही है। एक तरफ, विशाखापत्तनम के पास स्थित Bhogapuram इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन जल्द होने वाला है, जो इसके तेज निर्माण की गवाही दे रहा है। वहीं दूसरी ओर, चेन्नई के लिए प्रस्तावित Parandur एयरपोर्ट लैंड एक्विजिशन (Land Acquisition) में लगातार आ रही बाधाओं के चलते अभी भी शुरुआती प्लानिंग स्टेज (Planning Stage) में अटका हुआ है।
Bhogapuram प्रोजेक्ट की तेजी
Bhogapuram एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को तब गति मिली जब GMR Airports ने 2020 में इसका कॉन्सेशन (Concession) हासिल किया, और मई 2023 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस प्रोजेक्ट की अपेक्षाकृत सुगम प्रगति का मुख्य कारण अधिग्रहित की गई भूमि का प्रकार रहा। साइट पर मुख्य रूप से सूखी कृषि भूमि, सरकारी ज़मीनें और कम आबादी घनत्व वाली झाड़ियाँ थीं। इस वजह से, बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में अक्सर देखे जाने वाले तीव्र सामाजिक और पर्यावरणीय विरोध के बिना प्रोजेक्ट आगे बढ़ सका। निवेशकों के लिए, यह दर्शाता है कि भूमि का वर्गीकरण और अधिग्रहण में आसानी बड़े कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-Intensive) प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा होने के लिए कितने ज़रूरी हैं।
Parandur प्रोजेक्ट की मुश्किलें
उधर, Parandur प्रोजेक्ट, जिसे 2023 में केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी (In-principle Approval) मिली थी, को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है। प्रोजेक्ट के लिए लगभग 5,000 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें से कई उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि बताई जा रही है। स्थानीय समुदायों ने कृषि आजीविका के नुकसान और स्थानीय आर्द्रभूमि (Wetlands) पर संभावित पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर कड़ा विरोध जताया है, जो क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बाढ़ बफर का काम करती हैं। इन अनसुलझी समस्याओं के कारण प्रोजेक्ट अपनी मूल विकास अपेक्षाओं से काफी पीछे, शुरुआती चरणों में ही फंसा हुआ है।
व्यापार और प्रतिस्पर्धा पर असर
Parandur में हो रही देरी का तमिलनाडु के लिए सीधा आर्थिक प्रभाव है। चेन्नई का मौजूदा एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से ही दबाव में है, और एयर कार्गो (Air Cargo) सुविधाओं में भीड़ और लंबी प्रोसेसिंग टाइम का सामना करना पड़ रहा है। प्रोजेक्ट के अटके रहने के कारण, ट्रेड एनालिस्ट्स (Trade Analysts) का कहना है कि एक्सपोर्टर्स (Exporters) कुशल लॉजिस्टिक्स (Logistics) सुनिश्चित करने के लिए बेंगलुरु, हैदराबाद या कोच्चि जैसे पड़ोसी हब का रुख कर सकते हैं। इस बदलाव से तमिलनाडु की एक प्रमुख विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, क्योंकि आधुनिक, उच्च-क्षमता वाले हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे की कमी औद्योगिक विकास को बाधित कर सकती है।
भविष्य की ओर देखते हुए, निवेशकों और हितधारकों के लिए मुख्य बात यह है कि राज्य सरकार Parandur में भूमि अधिग्रहण की गतिरोध को कैसे हल करती है। पर्यावरणीय और स्थानीय सामुदायिक चिंताओं को दूर करने की समय-सीमा यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होगी कि प्रोजेक्ट कब औपचारिक निर्माण की ओर बढ़ सकता है। इसके विपरीत, Bhogapuram प्रोजेक्ट के लिए, ध्यान परिचालन शुरू करने, राजस्व उत्पन्न करने और आगामी उद्घाटन के बाद यात्री और कार्गो ट्रैफिक को बढ़ाने पर केंद्रित होगा।
