आंध्र प्रदेश के भोगपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आखिरकार एयरोडोम लाइसेंस मिल गया है, जिससे यहाँ से कॉमर्शियल उड़ानों का रास्ता साफ हो गया है। GMR ग्रुप द्वारा विकसित इस नए एयरपोर्ट को विशाखापत्तनम एयरपोर्ट का मुख्य रीजनल हब बनने की उम्मीद है।
भोगपुरम एयरपोर्ट को मिली लाइसेंसिंग हरी झंडी
आंध्र प्रदेश में बन रहे भोगपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एविएशन मिनिस्ट्री से एयरोडोम लाइसेंस मिल गया है। यह इस बड़े ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के पूरा होने का एक अहम पड़ाव है। इस मंजूरी के बाद अब एयरपोर्ट पर कॉमर्शियल फ्लाइट्स की शुरुआत की जा सकती है। यह एयरपोर्ट आंध्र प्रदेश के उत्तर तटीय इलाके में स्थित है और इसे GMR ग्रुप, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और राज्य सरकार के पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत बनाया गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशनल क्षमता
दिसंबर 2026 के टारगेट से 6 महीने पहले तैयार हुए इस एयरपोर्ट को फेजवाइज 4 करोड़ पैसेंजर्स को हैंडल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। पैसेंजर ट्रैफिक के अलावा, यहाँ 20,000 मीट्रिक टन सालाना क्षमता वाला कार्गो टर्मिनल भी बनाया गया है। यह टर्मिनल लोकल इंडस्ट्रीज, खासकर समुद्री भोजन, फार्मा और आम जैसे कृषि उत्पादों के एक्सपोर्ट में मदद करेगा। इस नए और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से विशाखापत्तनम एयरपोर्ट की मौजूदा दिक्कतों को दूर किया जाएगा, जो फिलहाल रीजनल एयर ट्रैफिक को संभाल रहा है।
रीजनल इकोनॉमी पर असर
यह प्रोजेक्ट उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग और टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बनाया जा रहा है। सरकारी अधिकारी एयरपोर्ट को विशाखापत्तनम से जोड़ने वाले 6-लेन कोस्टल कॉरिडोर और संभावित डबल-डेकर मेट्रो रेल लिंक जैसे बेहतर कनेक्टिविटी प्लान पर भी विचार कर रहे हैं। इस नए एयरपोर्ट के शुरू होने से रीजनल एविएशन का पूरा परिदृश्य बदलने की उम्मीद है, और ज्यादा ट्रैफिक पुराने, सीमित क्षमता वाले एयरपोर्ट से हटकर यहाँ आएगा।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
GMR ग्रुप, जिसने इस प्रोजेक्ट को लीड किया है, पैसेंजर और कार्गो ऑपरेशन्स से होने वाली लंबी अवधि की कमाई से फायदा उठाने की उम्मीद कर रहा है। निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि नई फ्लाइट्स कब से शुरू होती हैं और एयरलाइंस कितनी जल्दी इस नए फैसिलिटी पर शिफ्ट होती हैं। जैसे-जैसे एयरपोर्ट एक एक्टिव कॉमर्शियल एसेट बनेगा, पैसेंजर ट्रैफिक, कार्गो यूटिलाइजेशन रेट और किसी भी डेट-सर्विसिंग की मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का आकलन करने के लिए ज़रूरी होगी। प्रधानमंत्री द्वारा इसके इनॉगरेशन की तारीख तय की जा रही है, जिसके कुछ समय बाद कॉमर्शियल ऑपरेशन्स शुरू हो सकते हैं।
