Bengaluru Metro Pink Line: पिंक लाइन का एलिवेटेड सेक्शन तैयार, सेफ्टी क्लीयरेंस मिली

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Bengaluru Metro Pink Line: पिंक लाइन का एलिवेटेड सेक्शन तैयार, सेफ्टी क्लीयरेंस मिली

बेंगलुरु मेट्रो की पिंक लाइन के **7.5 किलोमीटर** लंबे एलिवेटेड सेक्शन को सेफ्टी क्लीयरेंस मिल गई है, जिससे इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि उद्घाटन की तारीख पर अभी सस्पेंस बना हुआ है।

बेंगलुरु मेट्रो की पिंक लाइन ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (CMRS) ने 7.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड स्ट्रेच को मंजूरी दे दी है। यह हिस्सा कलीना अग्रहारा से टावरकेरे तक फैला है और तकनीकी रूप से अब परिचालन के लिए तैयार है। हालांकि, कयास लगाए जा रहे हैं कि उद्घाटन 13 नवंबर, 2026 के आसपास हो सकता है, लेकिन बैंगलोर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) की ओर से अभी कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं की गई है।

प्रोजेक्ट का दायरा और टाइमलाइन

यह एलिवेटेड सेक्शन कुल 21.26 किलोमीटर लंबी पिंक लाइन का एक हिस्सा है, जो बेंगलुरु मेट्रो के फेज-2 विस्तार का अहम प्रोजेक्ट है। वर्तमान में जो काम पूरा हुआ है, वह दक्षिणी हिस्सा है। बाकी का 13.76 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड नेटवर्क है, जो शहर के मुख्य केंद्रों जैसे शिवाजीनगर और नागावारा को जोड़ेगा। इस अंडरग्राउंड टनलिंग का काम 2027 तक पूरा होने का लक्ष्य है, जिसका मतलब है कि लाइन का पूरा फायदा आम जनता को तभी मिल पाएगा।

वित्तीय और ऑपरेशनल चुनौतियां

बुनियादी ढांचे में प्रगति के बावजूद, BMRCL को काफी वित्तीय और ऑपरेशनल जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रोजेक्ट में देरी और लागत बढ़ने (Cost Overruns) के पुराने मामले रहे हैं। इसके अलावा, कंपनी पर भारी कर्ज का बोझ है, जो ज्यादातर विदेशी मुद्रा लोन से जुड़ा है। रुपये की कीमतों में उतार-चढ़ाव से इस कर्ज को चुकाने की लागत बढ़ जाती है, जिससे कंपनी पर दबाव बना रहता है।

इसके अलावा, CAG की पिछली रिपोर्ट्स में कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ चुके हैं। ये ऑडिट उन चुनौतियों की याद दिलाते हैं जो अरबों रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में आती हैं।

निवेशकों और नागरिकों के लिए क्या है अहम?

जो लोग इस मेट्रो नेटवर्क पर नजर रख रहे हैं, उनके लिए अब उद्घाटन की तारीख का ऐलान सबसे महत्वपूर्ण है। हालांकि, असली चुनौती अंडरग्राउंड सेक्शन के निर्माण की गति है। अगर यह 2027 की समय सीमा में पूरा नहीं होता, तो प्रोजेक्ट की लागत और बढ़ सकती है। साथ ही, BMRCL के कर्ज और वित्तीय प्रबंधन पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यही इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की लॉन्ग-टर्म स्थिरता तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.