Bengaluru की Namma Metro Blue Line प्रोजेक्ट पर संकट के बादल छा गए हैं। तमिलनाडु से पत्थर और एग्रीगेट के एक्सपोर्ट पर लगी रोक के कारण प्रोजेक्ट में **40,000 टन** की कमी आ गई है, जिससे कंस्ट्रक्शन लागत दोगुनी हो गई है।
बेंगलुरु की 58 किलोमीटर लंबी Namma Metro Blue Line के निर्माण कार्य पर तमिलनाडु से पत्थर और एग्रीगेट के निर्यात पर लगी लंबी रोक के कारण भारी दबाव बन गया है। 27 जुलाई, 2026 से लागू इन पाबंदियों ने क्रश किए हुए पत्थर और क्वारी डस्ट की 40,000 टन से अधिक की भारी कमी पैदा कर दी है, जो सिल्क बोर्ड से केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक के इस मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए बेहद जरूरी हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर मार्जिन पर बढ़ते दबाव का खतरा
इस सप्लाई चेन की बाधा का सीधा असर कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्टर्स के ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ रहा है। पहले ठेकेदार होसुर की इकाइयों से सामग्री मंगवाते थे, लेकिन अब उन्हें बिदादी (Bidadi) के वैकल्पिक विक्रेताओं पर निर्भर होना पड़ रहा है। इस बदलाव के चलते कच्ची सामग्री की कीमत लगभग ₹800 प्रति टन से बढ़कर ₹1,600 प्रति टन तक पहुंच गई है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए लागत में यह अचानक आई तेजी एक बड़ी चुनौती है। हालांकि कई कॉन्ट्रैक्ट्स में इन्फ्लेशन क्लॉज होते हैं, लेकिन 100% की यह प्राइस हाइक और लॉजिस्टिक्स का अतिरिक्त खर्च प्रोजेक्ट के मुनाफे को निचोड़ सकता है।
प्रोजेक्ट की रफ्तार और भविष्य के जोखिम
लागत के अलावा, समय सीमा (Project Timelines) को लेकर भी जोखिम बढ़ गया है। हेब्बल (Hebbal) के पास एक विशेष थ्री-पियर पोर्टल स्ट्रक्चर पर काम चल रहा है, जिसे भविष्य में ऑरेंज लाइन (Orange Line) के साथ इंटीग्रेट किया जाना है। यदि आवश्यक एग्रीगेट समय पर नहीं मिले, तो इन तकनीकी संरचनाओं के निर्माण की गति धीमी हो सकती है। निवेशकों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये कंपनियां इस अतिरिक्त बजट को संभाल पाती हैं या फिर प्रोजेक्ट की डेडलाइन पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है।
