Bengaluru-Goa Vande Bharat: स्पीड की सुस्ती से खुला इंफ्रास्ट्रक्चर का सच, निवेश के नजरिए से समझें चुनौती

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AuthorNeha Patil|Published at:
Bengaluru-Goa Vande Bharat: स्पीड की सुस्ती से खुला इंफ्रास्ट्रक्चर का सच, निवेश के नजरिए से समझें चुनौती

आगामी Bengaluru-Madgaon Vande Bharat Express की रफ्तार महज **53-54 किमी/घंटा** रहने वाली है। यह Vande Bharat फ्लीट की सबसे धीमी ट्रेनों में से एक होगी, जो आधुनिक ट्रेनों और पुरानी रेल पटरियों के बीच के तालमेल की चुनौती को उजागर करती है।

नवंबर 2026 में शुरू होने वाली Bengaluru (Yesvantpur) और Madgaon (Goa) के बीच चलने वाली Vande Bharat Express अपनी स्पीड को लेकर चर्चा में है। हालांकि Vande Bharat का नाम प्रीमियम और तेज रफ्तार के लिए जाना जाता है, लेकिन इस रूट पर ट्रेन की औसत गति 53 से 54 किमी/घंटा ही रहने की उम्मीद है। यह स्पीड साधारण मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के बराबर है, जो इस ब्रांड की पहचान से काफी अलग है।

इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा पेंच

इस धीमी रफ्तार के पीछे की मुख्य वजह पश्चिमी घाट (Western Ghats) का कठिन भौगोलिक इलाका है। विशेष रूप से Sakleshpur-Subrahmanya Road के सेक्शन में ढलान और घुमावदार पटरियों के कारण सुरक्षा मानकों को देखते हुए गति सीमा तय की गई है। Vande Bharat ट्रेनें भले ही 180 किमी/घंटा की टॉप स्पीड के लिए बनी हों, लेकिन उनकी वास्तविक परफॉर्मेंस पटरियों की क्षमता पर टिकी है। पुराने रेल नेटवर्क पर आधुनिक ट्रेनें चलाने में आ रही यह तकनीकी बाधा एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

आधुनिकता बनाम पुरानी चुनौतियां

Indian Railways पिछले एक दशक से इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी पैसा खर्च कर रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 130 किमी/घंटा से अधिक गति वाली पटरियों की लंबाई 2014 में 5,000 किलोमीटर थी, जो 2025 तक बढ़कर 23,000 किलोमीटर से ज्यादा हो गई है। इसके लिए 60 किलो की भारी रेल और कंक्रीट स्लीपरों का उपयोग किया जा रहा है। फिर भी, पहाड़ी इलाकों में इंजीनियरिंग की चुनौतियां जटिल हैं जिन्हें केवल नई ट्रेनें लाने से हल नहीं किया जा सकता।

निवेशकों के लिए सबक

रेलवे सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को यह समझना होगा कि सिर्फ फ्लीट का विस्तार ही काफी नहीं है, बल्कि नेटवर्क की तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। सरकार का भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) नेटवर्क की बाधाओं को हटाने पर केंद्रित है, लेकिन Bengaluru-Goa जैसा रूट यह संकेत देता है कि पूरे सिस्टम को हाई-स्पीड के अनुकूल बनाने में अभी कई साल लगेंगे। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, सिग्नलिंग और रोलिंग स्टॉक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के निवेशकों को प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और ट्रैक रिन्यूअल की गति पर बारीक नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.