Kempegowda International Airport ने फ्लाइट्स की आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए 'Point Merge System' का **3 महीने** लंबा ट्रायल शुरू कर दिया है। दक्षिण एशिया में यह तकनीक अपनाने वाला यह पहला एयरपोर्ट है, जिसका मकसद एयरस्पेस क्षमता बढ़ाना और फ्यूल की खपत कम करना है।
बेंगलुरु के Kempegowda International Airport ने दक्षिण एशिया में पहली बार 'Point Merge System' (PMS) को लागू कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसे ऑपरेट करने वाली कंपनी, Bengaluru International Airport Limited (BIAL) ने 3 सितंबर, 2026 से इसका ट्रायल शुरू किया है, जो 2 दिसंबर, 2026 तक चलेगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी Airports Authority of India और DGCA द्वारा की जा रही है।
नई तकनीक कैसे काम करेगी?
यह सिस्टम पारंपरिक 'मैन्युअल वेक्टरिंग' की जगह लेगा, जिसमें एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को विमानों को मैन्युअली गाइड करना पड़ता था। अब इसके बजाय ऑटोमेटेड सीक्वेंसिंग आर्क्स का इस्तेमाल होगा। Akasa Air ने पहले ही इस तकनीक का सफल पायलट रन पूरा कर लिया है। इससे हवा में विमानों के चक्कर काटने की मजबूरी कम होगी, जिससे एयरलाइंस का फ्यूल बचेगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
फाइनेंशियल और एक्सपेंशन पर असर
निवेशकों के नजरिए से यह कदम काफी अहम है। BIAL फिलहाल ₹19,800 करोड़ के मेगा एक्सपेंशन प्लान पर काम कर रहा है, ताकि 2028 तक सालाना 85 मिलियन यात्रियों की क्षमता हासिल की जा सके। चूंकि एयरपोर्ट के भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹9,000 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जैसे कर्ज लिए गए हैं, ऐसे में रनवे बढ़ाए बिना एयरस्पेस की दक्षता (Efficiency) बढ़ाना कंपनी के रिटर्न्स के लिए बेहद जरूरी है।
जोखिम और निगरानी
BIAL में Fairfax India Holdings की 54% हिस्सेदारी है, इसलिए इस एयरपोर्ट की परफॉर्मेंस सीधे तौर पर उनके शेयरधारकों के लिए मायने रखती है। हालांकि, यह तकनीक अभी ट्रायल फेज में है। दक्षिण एशिया में पहली बार इसके इस्तेमाल के कारण कुछ तकनीकी जोखिम भी हो सकते हैं। दिसंबर में ट्रायल खत्म होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या यह सिस्टम एयरपोर्ट की कमाई और कर्ज चुकाने की क्षमता को उम्मीद के मुताबिक मजबूती दे पाएगा।
