लक्षद्वीप में SkyHop Aviation की सीप्लेन सर्विस को स्थानीय प्रशासन ने लॉन्च से कुछ दिन पहले ही रोक दिया है। केंद्रीय एविएशन मंत्रालय ने अब इस मामले में जांच बिठा दी है, जिससे सरकार की कनेक्टिविटी योजना फिलहाल अधर में लटक गई है और ऑपरेटर को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
केंद्रीय एविएशन मंत्रालय ने लक्षद्वीप में SkyHop Aviation द्वारा शुरू की जाने वाली सीप्लेन सर्विस को अचानक रोके जाने पर औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह प्रोजेक्ट 16 सितंबर, 2026 को लॉन्च होने वाला था, लेकिन स्थानीय प्रशासन के फैसले ने सब कुछ ठप कर दिया। कंपनी ने सरकारी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया था, जिसे अब बड़ा झटका लगा है।
तैयारी और निवेश पर पानी
दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने सभी जरूरी परमिशन पहले ही ले ली थी। अप्रैल 2026 में DGCA (Directorate General of Civil Aviation) ने कंपनी को एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट दिया था। इसके बाद कंपनी ने 40 से ज्यादा सफल ट्रायल फ्लाइट्स कीं और 5 द्वीपों को जोड़ने के लिए वाटर जेट्टी का निर्माण भी पूरा कर लिया था।
प्रशासन का तर्क और विवाद
लक्षद्वीप प्रशासन ने 21 सितंबर को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को सूचित किया कि उनके पास वाटर एयरोड्रोम संचालन का अनुभव नहीं है, इसीलिए अनुमति नहीं दी गई। यह मामला अब केंद्र के 'UDAN' स्कीम और स्थानीय प्रशासन के आदेशों के बीच एक बड़े विवाद के रूप में उभर कर आया है।
फिलहाल, कंपनी अपने भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर के साथ बिना किसी रेवेन्यू के खड़ी है, जिससे भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। मंत्रालय का हस्तक्षेप अब यह तय करेगा कि क्या स्थानीय प्रशासन केंद्र के निर्देशों को मानेगा या यह प्रोजेक्ट और लंबे समय तक अधर में लटका रहेगा।
