केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने पंजाब के स्टार्टअप Nalwa Aero के eVTOL एयरक्राफ्ट की टेस्ट फ्लाइट्स का जायजा लिया है। कंपनी को शुरुआती रेगुलेटरी मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन अभी एयरवर्थनेस सर्टिफिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर की कड़ी चुनौतियों को पार करना बाकी है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू द्वारा पंजाब के स्टार्टअप Nalwa Aero के इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट की टेस्टिंग देखने के बाद भारत में शहरी एयर मोबिलिटी की चर्चा तेज हो गई है। यह स्टार्टअप फिलहाल अपने शुरुआती चरण में है, लेकिन मंत्रालय की दिलचस्पी ने इसे नई ऊर्जा दी है।
क्या है इस एयरक्राफ्ट की खासियत?
Nalwa Aero का प्रोटोटाइप 'बॉक्स-विंग' डिजाइन और 'टिल्टिंग-रोटर' इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन पर आधारित है, जिससे इसे उड़ान भरने के लिए लंबी रनवे की जरूरत नहीं पड़ती। यह 5-सीट वाला एयरक्राफ्ट एयर टैक्सी, मेडिकल इमरजेंसी और कार्गो मूवमेंट के लिए तैयार किया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि यह तकनीक ट्रैफिक की समस्या को हवा में सुलझाने में मदद करेगी, बशर्ते यह सुरक्षा मानकों पर खरा उतरे।
रेगुलेटरी माइलस्टोन्स (Regulatory Milestones)
कंपनी ने DGCA के साथ कुछ बड़े कदम पूरे कर लिए हैं:
- जून 2025: Design Organisation Approval हासिल किया।
- जनवरी 2026: टाइप-सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन जमा किया।
एक्सपेरिमेंटल टेस्टिंग से फुल एयरवर्थनेस सर्टिफिकेशन तक का सफर काफी कठिन है, जिसमें कड़े सेफ्टी असेसमेंट से गुजरना पड़ता है।
चुनौतियां अभी भी बरकरार
सरकारी सपोर्ट के बावजूद, राह आसान नहीं है। सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती 'बैटरी एनर्जी डेंसिटी' है, जो तय करती है कि एयरक्राफ्ट हवा में कितनी देर टिकेगा। इसके अलावा, घनी आबादी वाले शहरों में 'नॉइज मैनेजमेंट' (शोर नियंत्रण) और 'वर्टीपोर्ट्स' (Vertiports) जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव अभी भी बड़े रोड़े हैं।
अब कंपनी को अपनी तकनीक की लागत और सुरक्षा रिकॉर्ड को साबित करना होगा, ताकि कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने से पहले वह DGCA की सख्त गाइडलाइन्स को पूरा कर सके।
