Federation of Indian Airlines ने सरकार से गुहार लगाई है कि ECLGS 5.0 के तहत मिलने वाली फंड की राशि जल्द जारी की जाए। हाई फ्यूल प्राइस और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण एयरलाइंस को कैश क्रंच का सामना करना पड़ रहा है।
फंड रिलीज में क्यों आ रही है रुकावट?
Federation of Indian Airlines (FIA) ने सिविल एविएशन मिनिस्टर K Rammohan Naidu को पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर की है। FIA, जिसमें Air India, IndiGo, और SpiceJet जैसे दिग्गज शामिल हैं, का कहना है कि योजना के तहत 90% की सरकारी गारंटी होने के बावजूद बैंक फंड रिलीज करने में हिचकिचा रहे हैं। यह सुस्ती एयरलाइंस के रोजमर्रा के कामकाज पर भारी पड़ रही है।
क्यों दबाव में है एविएशन सेक्टर?
एयरलाइंस इस वक्त दोहरी मार झेल रही हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और हाई फ्यूल प्राइस ने एविएशन सेक्टर की कमर तोड़ दी है। ATF (Aviation Turbine Fuel) की कीमतें ₹137 प्रति लीटर के करीब बनी हुई हैं। इसके अलावा, रुपए में कमजोरी और फ्लाइट्स के डायवर्जन से जुड़ी लागत ने कंपनियों का वर्किंग कैपिटल बिगाड़ दिया है।
SpiceJet और अन्य पर असर
SpiceJet को फिलहाल इस योजना के तहत ₹150 करोड़ की पहली किस्त मिली है, लेकिन बाकी के फंड का इंतज़ार अभी भी बना हुआ है। बता दें कि इस स्कीम के तहत हर पात्र एयरलाइन को ₹1,500 करोड़ तक की सहायता का प्रावधान है।
निवेशकों के लिए सबक
अगर बैंकों की यह 'रिस्क-एवर्स' नीति जारी रही, तो एयरलाइंस का ऑपरेशनल रिस्क बढ़ सकता है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सिविल एविएशन मिनिस्ट्री बैंकिंग सेक्टर के साथ कोई ठोस रास्ता निकाल पाती है। शॉर्ट-टर्म में उन एयरलाइंस पर नजर रखें जिनकी फाइनेंशियल हेल्थ फिलहाल कमजोर है, क्योंकि फंड का समय पर मिलना उनके सर्वाइवल के लिए बेहद जरूरी है।
