सप्लाई चेन की बाधाएं ग्रोथ पर भारी
विली वाल्श के मुताबिक, सप्लाई चेन में चल रहा यह गंभीर संकट एविएशन इंडस्ट्री को हर साल $11 बिलियन से ज्यादा का नुकसान पहुंचा रहा है। इसके पीछे कई वजहें हैं, जिनमें पुराने हो रहे बेड़े (Fleet) के लिए पुर्जों की कमी और नए विमानों व इंजनों की देरी से डिलीवरी शामिल है। इस वजह से दुनिया भर में एयरक्राफ्ट की औसत उम्र बढ़कर रिकॉर्ड 14.8 साल हो गई है। Airbus और Boeing जैसी बड़ी कंपनियां प्रोडक्शन की चुनौतियों से जूझ रही हैं, वहीं इंजन बनाने वाली कंपनियां भी नए ऑर्डर और मेंटेनेंस का दबाव झेल रही हैं। अनुमान है कि 17,000 से ज्यादा विमानों का जो बैकलॉग (Backlog) अभी है, उसे पूरा होने में एक दशक या उससे भी ज्यादा का समय लग सकता है। इस कमी की वजह से न सिर्फ बेड़े को अपडेट करने में दिक्कत आ रही है, बल्कि मेंटेनेंस और लीजिंग के खर्च भी बढ़ गए हैं।
जियो-पॉलिटिक्स का कार्गो पर असर
एयर कार्गो (Air Cargo) पर भू-राजनीतिक बदलावों का असर पैसेंजर सर्विसेज से कहीं ज्यादा दिख रहा है। ट्रेड वॉर (Trade War) और अमेरिका की टैरिफ (Tariff) पॉलिसी जैसे मसलों ने पुराने एयर फ्रेट रूट्स को बुरी तरह प्रभावित किया है। वाल्श ने बताया कि पिछले साल एशिया और उत्तरी अमेरिका के बीच एयर कार्गो शिपमेंट्स में 0.8% की गिरावट दर्ज की गई, जो इस महत्वपूर्ण रूट के लिए असामान्य है। इसके विपरीत, यूरोप और एशिया के बीच कार्गो वॉल्यूम में 10.3% का बड़ा उछाल देखा गया है। यह दिखाता है कि ग्लोबल ट्रेड के रूट कैसे बदल रहे हैं और कैसे भू-राजनीतिक घटनाएं कार्गो की मांग और रूटिंग को प्रभावित कर रही हैं।
एशिया-पैसिफिक में ग्रोथ, पर इंफ्रास्ट्रक्चर की चिंता
एशिया-पैसिफिक क्षेत्र (Asia-Pacific Region) ग्लोबल एयर ट्रैवल ग्रोथ का एक बड़ा इंजन बना हुआ है, खासकर चीन और भारत जैसे बाजारों के कारण। 2026 तक इस क्षेत्र में पैसेंजर ट्रैफिक ग्रोथ 7.3% रहने का अनुमान है। हालांकि, इस तेजी के साथ ही एक बड़ी चेतावनी भी सामने आई है। इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) के प्रेसिडेंट टोशियुकी ओनुमा ने आगाह किया है कि इस क्षेत्र का मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) बढ़ती पैसेंजर वॉल्यूम को संभालने के लिए तैयार नहीं है। बिना बड़े बदलावों और ग्लोबल कोऑर्डिनेशन के, एयरपोर्ट्स और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर भारी दबाव बढ़ेगा।
आगे का रास्ता और उम्मीदें
इन तमाम मुश्किलों के बावजूद, ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री में पैसेंजर ट्रैफिक ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। 2026 तक ग्लोबल ट्रैफिक में 4.9% की बढ़ोतरी का अनुमान है। एयरलाइंस से रिकॉर्ड मुनाफा कमाने की उम्मीद है, लेकिन भू-राजनीतिक अस्थिरता और संरक्षणवाद (Protectionism) के चलते मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है। इंडस्ट्री पर 2050 तक नेट-जीरो कार्बन एमिशन (Net-Zero Carbon Emissions) के लक्ष्य को पाने का दबाव भी है। फिलहाल, इंडस्ट्री की सबसे बड़ी प्राथमिकता सप्लाई चेन की बाधाओं, भू-राजनीतिक बदलावों और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को सुलझाकर स्थिर ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी सुनिश्चित करना है।