पर्यावरण के अनुकूल और कुशल रेल यात्रा
आंध्र प्रदेश अब उन राज्यों में शुमार हो गया है जहां रेलवे का पूरा नेटवर्क बिजली से चलेगा। इस विद्युतीकरण से न केवल परिचालन लागत कम होगी, बल्कि भारतीय रेलवे के पर्यावरण पदचिह्न (environmental footprint) को भी काफी हद तक घटाने में मदद मिलेगी। यह हरित और अधिक कुशल रेल यात्रा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राज्य के लिए नया रेलवे ज़ोन
रेलवे प्रशासन और दक्षता को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से, 1 जून 2026 तक आंध्र प्रदेश में एक नया 'साउथ कोस्टल रेलवे ज़ोन' स्थापित किया जाएगा। इस नए ज़ोन का लक्ष्य राज्य के बढ़ते रेल नेटवर्क के संचालन और योजना को सुव्यवस्थित करना है।
रिकॉर्ड निवेश और कनेक्टिविटी परियोजनाएं
विद्युतीकरण के साथ-साथ, आंध्र प्रदेश में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश किया जा रहा है। राज्य को रिकॉर्ड ₹10,134 करोड़ का रेलवे बजट मिला है, जो पिछले आवंटन की तुलना में एक बड़ी छलांग है। वर्तमान में, राज्य में लगभग ₹1.06 लाख करोड़ की लागत वाली परियोजनाएं चल रही हैं। इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस प्रमुख बंदरगाहों (ports), पर्यटन स्थलों (tourism hubs) और शहरी केंद्रों (urban centers) तक कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। इसके तहत 74 स्टेशनों का रीडेवलपमेंट, सैकड़ों फ्लाईओवर और अंडरपास का निर्माण, और हजारों किलोमीटर नई रेलवे ट्रैक बिछाने का काम शामिल है।
यात्री और माल ढुलाई में बड़ा सुधार
'ईस्ट कोस्ट रेलवे कॉरिडोर' को चार-लाइन नेटवर्क में अपग्रेड करने से ट्रेनों की क्षमता दोगुनी हो जाएगी, जिससे 500 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। यात्री सेवाओं को पहले ही 16 वंदे भारत और 22 अमृत भारत ट्रेनों के साथ बेहतर बनाया जा चुका है। माल ढुलाई (cargo transport) में भी सुधार होगा, जो लॉजिस्टिक्स और राज्य की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगा। दक्षिण के शहरों को जोड़ने वाले 'हाई-स्पीड डायमंड' नेटवर्क की योजनाएं यात्रा के समय को काफी कम करने का वादा करती हैं, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं का एकीकरण और मजबूत होगा।
