Akasa Air के CEO विनय दुबे ने एक बड़े प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसके तहत एयरपोर्ट ऑपरेटर भी एयरलाइन कंपनियों के मालिक बन सकेंगे। दुबे का मानना है कि इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, IndiGo जैसी बड़ी एयरलाइनों ने इस पर आपत्ति जताई है और हितों के टकराव (Conflict of Interest) की चेतावनी दी है।
Akasa Air के CEO विनय दुबे ने भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए एक संभावित नीतिगत बदलाव का खुलकर समर्थन किया है। उनका मानना है कि एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन खरीदने की इजाजत मिलने से देश में प्रतिस्पर्धा (Competition) बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा आम यात्रियों को बेहतर विकल्प और सेवाएं मिलने के रूप में होगा।
यह प्रस्ताव इंडस्ट्री में एक बड़ी बहस छेड़ गया है कि विस्तार और निष्पक्ष खेल के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। दुबे को भरोसा है कि सरकार इस मामले की जटिलताओं को समझती है और अगर यह नीति लागू होती है तो अनुचित प्रथाओं को रोकने के लिए नियम बनाएगी।
हितों के टकराव का बड़ा डर
हालांकि, सभी इंडस्ट्री लीडर्स इस उम्मीदवाद को साझा नहीं करते। इस प्रस्ताव का विरोध सबसे ज़्यादा IndiGo जैसी स्थापित एयरलाइनों ने किया है। उनका तर्क है कि एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन का मालिक बनाने से हितों का एक बड़ा टकराव पैदा होगा। मुख्य चिंता यह है कि जो कंपनी फ्लाइट स्लॉट, पार्किंग बे और टर्मिनल जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं को कंट्रोल करती है, वह अपनी ही एयरलाइन को दूसरे प्रतिस्पर्धियों पर अनुचित लाभ दे सकती है। इससे एक ऐसी स्थिति बन सकती है जहाँ स्वतंत्र एयरलाइनों को आवश्यक सेवाएं हासिल करने में मुश्किल हो।
एयरपोर्ट ऑपरेटर्स का स्पष्टीकरण
एयरपोर्ट ऑपरेटरों द्वारा अपनी एयरलाइन शुरू करने की अटकलों पर भी चर्चा गर्म है। Adani Group, जो भारत के कई बड़े एयरपोर्ट्स का संचालन करता है, ने इन चिंताओं को दूर करने के लिए हाल ही में एक स्पष्टीकरण जारी किया है। समूह ने पुष्टि की है कि उनकी वाणिज्यिक एयरलाइन व्यवसाय में प्रवेश करने की कोई योजना नहीं है। कंपनी क्षेत्रीय एयरलाइनों में गैर-नियंत्रित हिस्सेदारी (Non-controlling Stakes) लेने में रुचि रखती है ताकि हवाई संपर्क (Air Connectivity) बेहतर हो सके, लेकिन एयरलाइन बाजार में बड़े पैमाने पर उतरने की मंशा से इनकार किया है।
रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
फिलहाल, भारतीय नियमों के तहत क्रॉस-ओनरशिप पर पहले से ही प्रतिबंध हैं। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े एयरपोर्ट्स के लिए नियमों के अनुसार, एयरपोर्ट ऑपरेटर किसी भी शेड्यूल्ड एयरलाइन में अधिकतम 10% इक्विटी हिस्सेदारी रख सकते हैं। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य एयरपोर्ट संचालन में तटस्थता बनाए रखना और एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर एकाधिकार नियंत्रण को रोकना था।
Akasa Air, जिसने अगस्त 2022 में अपना परिचालन शुरू किया था और वर्तमान में 40 विमानों का बेड़ा चलाती है, एक प्राइवेट कंपनी है और स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड नहीं है। जैसे-जैसे एविएशन मार्केट बढ़ रहा है, इंडस्ट्री नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) से किसी भी भविष्य की नीति अपडेट पर कड़ी नजर रखेगी। निवेशकों और बाजार सहभागियों के लिए मुख्य बात यह होगी कि सरकार बढ़ती विमानन क्षमता की आवश्यकता को संतुलित करते हुए हितों के टकराव की चिंताओं को कैसे दूर करती है।
