एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के बढ़ते दाम भारतीय एयरलाइंस की कमर तोड़ रहे हैं। Federation of Indian Airlines (FIA) ने सरकार से VAT में राहत की मांग की है क्योंकि अब फ्यूल का खर्च ऑपरेशनल लागत का **60%** तक पहुंच चुका है।
बढ़ता बोझ और वित्तीय संकट
भारतीय एविएशन सेक्टर इस समय एक गंभीर चुनौती से जूझ रहा है। ATF की कीमतें बढ़कर ₹137 प्रति लीटर के करीब पहुंच गई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए Federation of Indian Airlines (FIA) ने राज्य सरकारों से VAT में राहत को आगे बढ़ाने की गुहार लगाई है। एयरलाइंस के लिए फ्यूल का खर्च अब कुल ऑपरेशनल खर्च का 55% से 60% हो गया है, जो पहले महज 30% से 40% के आसपास रहता था।
एयरफेयर और डिमांड पर खतरा
मुनाफे को बचाने के लिए एयरलाइंस ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ाना शुरू कर दिया है। हालांकि, त्योहारों के सीजन से ठीक पहले टिकटों के दाम बढ़ने से पैसेंजर ट्रैफिक की डिमांड घटने का रिस्क बना हुआ है। इसके अलावा, रुपये की कमजोरी के कारण एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और लीज पेमेंट का खर्च भी बढ़ रहा है, जो एयरलाइंस के लिए दोहरी मार है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का नया पेंच
सिर्फ फ्यूल ही नहीं, बल्कि एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव भी एयरलाइंस के लिए चुनौती बना हुआ है। Adani Airport Holdings ने जनवरी 2027 से मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल 1B के रीडेवलपमेंट की योजना बनाई है। इसके चलते ऑपरेशंस को नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शिफ्ट करने का प्रस्ताव है।
हालांकि, एयरलाइंस इस शिफ्ट को लेकर आशंकित हैं। जानकारों का कहना है कि अगर ऑपरेशंस को समय से पहले शिफ्ट किया गया, तो एयरलाइंस के स्लॉट्स छिन सकते हैं और कनेक्टिंग फ्लाइट्स का नेटवर्क बिगड़ सकता है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार टैक्स रिलीफ पर क्या फैसला लेती है और एयरलाइंस व एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के बीच चल रही तनातनी का क्या नतीजा निकलता है।
