Federation of Indian Airlines ने दिल्ली सरकार से जेट फ्यूल पर लगे **7%** VAT को नवंबर के बाद भी जारी रखने का अनुरोध किया है। चूंकि ईंधन का खर्च एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च का आधे से ज्यादा हिस्सा है, इसलिए निवेशकों की नजर इस फैसले पर टिकी है।
टैक्स राहत या बोझ की चिंता?
Federation of Indian Airlines (FIA), जिसमें IndiGo, Air India और SpiceJet जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं, ने दिल्ली सरकार से Aviation Turbine Fuel (ATF) पर मिलने वाली टैक्स राहत को जारी रखने की अपील की है। मई में लागू हुई इस रियायत के तहत टैक्स को 25% से घटाकर 7% किया गया था, जो 16 नवंबर 2026 को खत्म होने जा रहा है।
एयरलाइंस पर लागत का दबाव
एयरलाइंस के लिए ईंधन सबसे बड़ा खर्च है। यह अब कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट का 50% से 55% तक पहुंच चुका है, जबकि पहले यह 30% से 40% के बीच रहता था। स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अक्टूबर में ही ATF की कीमतें ₹16 प्रति लीटर तक बढ़ी हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण लंबे रूट से उड़ानें भरनी पड़ रही हैं, जिससे फ्यूल की खपत और खर्च दोनों बढ़ गए हैं। वहीं, रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होने से लीजिंग और मेंटेनेंस का खर्च भी एयरलाइंस की जेब पर भारी पड़ रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
अगर सरकार ने इस राहत को आगे नहीं बढ़ाया, तो टैक्स वापस 25% पर पहुंच जाएगा। ऐसे में एयरलाइंस के पास दो ही रास्ते होंगे: या तो वे खुद इस बोझ को उठाएं जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर चोट पड़ेगी, या फिर वे टिकट के दाम बढ़ाकर इसका सीधा बोझ यात्रियों पर डालें। FIA का तर्क है कि 7% टैक्स के कारण दिल्ली में फ्यूल की बिक्री में 40% का इजाफा हुआ है, जो इकोनॉमी के लिए भी फायदेमंद है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार का रुख क्या रहता है।
