मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स की संख्या घटाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। एयरलाइंस ने 'Adani' समूह की कंपनी MIAL के प्रपोजल को मानने से इनकार कर दिया है और डेटा में पारदर्शिता की मांग की है। 28 अक्टूबर को होने वाली मीटिंग में इस मुद्दे पर बड़ा फैसला हो सकता है।
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 के रेनोवेशन के नाम पर फ्लाइट्स की संख्या कम करने के प्रस्ताव ने एविएशन सेक्टर में हलचल मचा दी है। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL), जो कि Adani Airport Holdings की सब्सिडियरी है, समर 2027 सीजन के लिए कैपेसिटी कम करना चाहती है, लेकिन एयरलाइंस इसके लिए तैयार नहीं हैं।
पारदर्शिता पर सवाल
एयरपोर्ट ऑपरेटर्स कमिटी ने साफ कर दिया है कि वे बिना ठोस सबूतों के फ्लाइट्स कम नहीं होने देंगे। एयरलाइंस का तर्क है कि टर्मिनल-1 पर सालाना यात्री संख्या 10 मिलियन से कम है, ऐसे में कैपेसिटी में इतनी बड़ी कटौती का कोई तार्किक आधार नहीं दिखता। एयरलाइंस ने मैनेजमेंट से स्पष्ट डेटा मांगा है ताकि यह पता चल सके कि क्या वाकई में रेनोवेशन के लिए उड़ानें रद्द करना अनिवार्य है।
नियम और रेगुलेशन की लड़ाई
एयरलाइंस ने मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन के 2013 स्लॉट-एलोकेशन गाइडलाइंस और IATA के मानकों का हवाला दिया है। उनका कहना है कि कोई भी बड़ा बदलाव एकतरफा नहीं होना चाहिए, बल्कि सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा के बाद ही लिया जाना चाहिए।
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह मुद्दा अहम है। मुंबई एयरपोर्ट अपनी पीक कैपेसिटी पर काम करता है और उड़ानों में कटौती का सीधा असर एयरलाइंस के रेवेन्यू पर पड़ेगा। साथ ही, नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक ऑपरेशन शिफ्ट करने का दबाव भी कंपनियों के लिए वित्तीय चुनौती खड़ा कर रहा है।
आगे क्या होगा?
टर्मिनल-1 का रीडेवलपमेंट 2030 तक चलने की उम्मीद है। अब सारी नजरें 28 अक्टूबर को होने वाली स्टेकहोल्डर मीटिंग पर टिकी हैं। क्या Adani समूह एयरलाइंस की मांग के आगे झुककर डेटा साझा करेगा, या यह मामला रेगुलेटरी हस्तक्षेप तक पहुंचेगा? यह देखना निवेशकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ स्ट्रैटेजी और इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग के बीच बैलेंस बनाना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
