एविएशन सेक्टर में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। एयरलाइंस और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के बीच VAT रिफंड को लेकर विवाद छिड़ गया है। ATF की कीमतें **₹137** प्रति लीटर तक पहुंचने के बाद एयरलाइंस ने **9 अक्टूबर 2026** से फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है, जिससे त्योहारी सीजन में हवाई सफर के महंगे होने का खतरा बढ़ गया है।
डोमेस्टिक एयरलाइंस फिलहाल ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के साथ VAT रिफंड को लेकर एक कड़े फाइनेंशियल विवाद में फंसी हैं। एयरलाइंस का आरोप है कि OMCs इस साल हुए अपने घाटे की भरपाई के लिए उनके फंड को रोक रही हैं। यह स्थिति एविएशन सेक्टर के लिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधा और रुपये की गिरावट के कारण ATF की लागत लगातार बढ़ रही है।
एयरलाइंस पर बढ़ा आर्थिक बोझ
आमतौर पर एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च में ATF का हिस्सा 30% से 40% होता था, जो अब बढ़कर 55% से 60% के स्तर पर पहुंच गया है। दिल्ली में ATF की कीमतें ₹137 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर हैं। एयरलाइंस का तर्क है कि VAT रिफंड रुकने से उनकी बैलेंस शीट पर बेवजह दबाव पड़ रहा है।
ग्राहकों पर पड़ेगा असर
बढ़ते खर्चों से निपटने के लिए IndiGo, Air India, Air India Express और Akasa Air ने 9 अक्टूबर 2026 से डोमेस्टिक और इंटरनेशनल दोनों उड़ानों के लिए फ्यूल सरचार्ज में संशोधन कर दिया है। हालांकि, इस कदम से एयरलाइंस अपने मार्जिन को बचाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इससे त्योहारी सीजन में डिमांड घटने का रिस्क भी है, क्योंकि यात्री कीमतों को लेकर काफी संवेदनशील होते हैं।
सरकार की मध्यस्थता
Federation of Indian Airlines (FIA) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) से गुहार लगाई है और ATF के लिए 'कॉस्ट-प्लस' प्राइसिंग मॉडल की मांग की है। केंद्रीय मंत्री K Ram Mohan Naidu ने संकेत दिए हैं कि सरकार ₹10,000 करोड़ के प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को फिर से शुरू करने पर विचार कर रही है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार और कंपनियां किसी समझौते पर पहुंच पाती हैं, जिससे एयरलाइंस के मार्जिन पर बुरा असर न पड़े।
